MP News: भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह का तलाक, आपसी सहमति से खत्म हुआ 9 साल पुराना रिश्ता

मध्य प्रदेश के शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र सिंह मरावी के बीच 9 साल पुराना वैवाहिक रिश्ता अब कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम न्यायालय ने दोनों की आपसी सहमति के आधार पर तलाक की डिक्री पारित की। दोनों पिछले 5 वर्षों से अलग रह रहे थे और कोर्ट में किसी प्रकार का गंभीर आरोप नहीं लगाया गया। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत यह तलाक मंजूर किया गया। अदालत ने 6 महीने के सुलह प्रयास के बाद अंतिम निर्णय दिया। बेटी की जिम्मेदारी मां हिमाद्री सिंह को दी गई है।

Sep 14, 2026 - 19:12
Sep 14, 2026 - 19:13
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MP News: भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह का तलाक, आपसी सहमति से खत्म हुआ 9 साल पुराना रिश्ता
भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह का तलाक

MP News: भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह का तलाक, आपसी सहमति से खत्म हुआ 9 साल पुराना रिश्ता

शहडोल/अनूपपुर । मध्य प्रदेश की शहडोल संसदीय सीट से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र सिंह मरावी के बीच करीब नौ साल पुराना वैवाहिक संबंध अब कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम न्यायालय ने दोनों की आपसी सहमति के आधार पर तलाक की डिक्री पारित कर दी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पिछले करीब 5 वर्षों से अलग रह रहे थे। कोर्ट में सुनवाई के दौरान पति-पत्नी ने एक-दूसरे पर कोई गंभीर आरोप नहीं लगाए और स्पष्ट किया कि अब साथ रहना संभव नहीं है। अदालत को बताया गया कि 5 मई 2021 से दोनों पूरी तरह अलग रह रहे हैं और सुलह की संभावनाएं समाप्त हो चुकी हैं।

2017 में हुई थी शादी, 2019 में बेटी का जन्म

हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी की शादी 23 नवंबर 2017 को राजेंद्रग्राम में हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुई थी। विवाह के बाद दोनों कुछ समय तक साथ रहे। 20 जून 2019 को उनकी बेटी गिरिशा सिंह का जन्म हुआ। हालांकि, समय के साथ छोटे-छोटे विवाद बढ़ते गए और रिश्ते में दूरियां आ गईं, जिसके बाद दोनों ने अलग रहने का फैसला किया।

कोर्ट में दोनों ने कहा—साथ रहना अब संभव नहीं

तलाक याचिका में दोनों पक्षों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वैवाहिक संबंध को आगे जारी रखना संभव नहीं है। हिमाद्री सिंह की ओर से अदालत में कहा गया कि दाम्पत्य जीवन पूरी तरह समाप्त हो चुका है। खास बात यह रही कि दोनों ने एक-दूसरे पर कोई आरोप नहीं लगाया और आपसी सहमति से विवाह विच्छेद की मांग की।

बेटी की जिम्मेदारी मां के पास

कोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि बेटी गिरिशा सिंह अपनी मां हिमाद्री सिंह के साथ रहेगी। उसके पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े सभी खर्च की जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह स्वयं उठाएंगी।

साथ ही उन्होंने पति से किसी प्रकार का भरण-पोषण या गुजारा भत्ता लेने से भी इनकार कर दिया। दोनों पक्षों के बीच संपत्ति, गिफ्ट या जेवरात को लेकर भी कोई विवाद नहीं रहा।

हिंदू विवाह अधिनियम के तहत प्रक्रिया के अनुसार, न्यायालय ने दोनों को पुनर्विचार और सुलह के लिए 6 महीने का समय दिया था। इस दौरान भी समझौता नहीं हो सका। अवधि पूरी होने के बाद दोनों ने कोर्ट में स्पष्ट कर दिया कि वे साथ नहीं रहना चाहते।

धारा 13-बी के तहत मिला तलाक

अंततः 3 सितंबर 2026 को राजेंद्रग्राम न्यायालय ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक की डिक्री पारित कर दी। अदालत ने माना कि दोनों के लिए पति-पत्नी के रूप में साथ रहना संभव नहीं है।

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