ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली में प्रदर्शन तेज, जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोका

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन तेज है। जानिए SIR विवाद, चुनाव आयोग के भीतर मतभेद और 2006 के केरल मामले की पूरी कहानी।

Oct 4, 2026 - 22:11
Oct 4, 2026 - 22:12
 0  5
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली में प्रदर्शन तेज, जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोका

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली में प्रदर्शन तेज, जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोका

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में दिल्ली में राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। रविवार को लगातार तीसरे दिन विभिन्न विपक्षी संगठनों और छात्र समूहों ने प्रदर्शन किया। आम आदमी पार्टी (AAP), AISA, NSUI समेत विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती के बीच उन्हें रास्ते में रोक दिया गया। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया। विरोध प्रदर्शन के केंद्र में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

जंतर-मंतर की ओर मार्च, बैरिकेडिंग के कारण टकराव

रविवार को AISA के कार्यकर्ता अशोका रोड क्षेत्र से जंतर-मंतर की ओर मार्च करने निकले। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने का प्रयास किया, जिसके बाद कुछ समय के लिए प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड पर चढ़ने की कोशिश करती दिखाई दीं। बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। संगठन की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें एक निजी वाहन में ले जाया गया और कुछ समय तक उनका ठिकाना स्पष्ट नहीं था। प्रदर्शन में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और कपिल सिब्बल के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।

SIR को लेकर विपक्ष का विरोध

विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और इसमें किसी भी तरह के बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी एवं जवाबदेह होनी चाहिए। विपक्ष विशेष रूप से SIR को लेकर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे कुछ मतदाताओं के नाम सूची से हटने या उनके मतदान अधिकार प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है। विपक्षी दल इस प्रक्रिया को तत्काल वापस लेने और मतदाता सूची के पुनरीक्षण में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा है और आयोग अपने निर्णय संस्थागत प्रक्रिया के तहत लेता है।

चुनाव आयोग के भीतर भी सामने आए मतभेद

ज्ञानेश कुमार से जुड़ा विवाद केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है। हाल की मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर भी SIR और उससे जुड़े कुछ निर्णयों को लेकर मतभेद सामने आने की बात कही गई है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इन आपत्तियों में मतदाता जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, SIR से संबंधित अपीलों तथा चुनावी डेटा और IT व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने ऐसे निर्णयों पर सवाल उठाए, जिन्हें उन्होंने अपनी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए जाने का आरोप लगाया। कुछ कदमों को लेकर कथित तौर पर 'unauthorised' और 'illegal' जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि आयोग के भीतर किसी मुद्दे पर अलग-अलग राय होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।

Form-6 में बदलाव भी विवाद के केंद्र में

नए मतदाता के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 को लेकर भी विवाद सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जुलाई 2026 में Form-6 में SIR से संबंधित एक सवाल शामिल किया गया था, जिसमें नए मतदाता से उसके अथवा उसके माता-पिता या दादा-दादी के पुराने SIR की मतदाता सूची में दर्ज होने से जुड़ी जानकारी मांगी गई। रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां दर्ज की गई थीं। विपक्षी दलों का कहना है कि ऐसी अतिरिक्त जानकारी की मांग नए मतदाताओं के पंजीकरण को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इस मुद्दे पर भी अंतिम कानूनी निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर उठे सवाल अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि आयोग के बहुसदस्यीय स्वरूप के बावजूद कुछ महत्वपूर्ण निर्णय कथित रूप से एकतरफा तरीके से लिए गए। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 तथा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से संबंधित 2023 के कानून के तहत आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन किए जाने की मांग की गई है। याचिका में SIR से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और कुछ मामलों में जांच की मांग भी की गई है। इस मामले में अदालत की सुनवाई को आगे के घटनाक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, किसी मामले की सुनवाई होना अपने आप में लगाए गए आरोपों के सही साबित होने का प्रमाण नहीं है। आरोपों की न्यायिक जांच और अंतिम निर्णय अलग प्रक्रिया है।

ज्ञानेश कुमार से जुड़ा 2006 का पुराना मामला भी चर्चा में

इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ा करीब दो दशक पुराना केरल का मामला भी फिर चर्चा में आ गया है। केरल सरकार ने 2006 के एक पुराने मामले की विजिलेंस जांच दोबारा शुरू करने का आदेश दिया है।यह मामला उस समय का है जब ज्ञानेश कुमार केरल के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव थे। मामला Kerala State Transport Project (KSTP) के तहत सड़क निर्माण/उन्नयन परियोजना से जुड़ा बताया गया है। परियोजना में PATI-BEL नामक इंडो-मलेशियन कंसोर्टियम के काम करने की बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना की लागत करीब 216 करोड़ रुपये थी।

मलेशियाई इंजीनियर की मौत से जुड़ा मामला

इस मामले में मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन (Lee See Been) की नवंबर 2006 में हुई मौत का संदर्भ सामने आता है। रिपोर्टों के मुताबिक, वह सड़क परियोजना में मुख्य प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में कार्यरत थे।

मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कथित सुसाइड नोट में तत्कालीन PWD सचिव ज्ञानेश कुमार का नाम आया था और भुगतान की मंजूरी से जुड़े कथित रिश्वत के आरोप लगाए गए थे।

हालांकि, इन आरोपों को लेकर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह मामला जांच का विषय है और इससे ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कोई अपराध न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हो जाता।

केरल सरकार की ओर से पुराने रिकॉर्ड की दोबारा जांच कराने का निर्णय इसी पृष्ठभूमि में सामने आया है।

7 अक्टूबर को INDIA गठबंधन का संयुक्त प्रदर्शन

अब INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में संयुक्त प्रदर्शन का ऐलान किया है। गठबंधन में शामिल विपक्षी दलों ने 7 अक्टूबर को चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) समेत अन्य दलों के प्रतिनिधियों की बैठक में संयुक्त प्रदर्शन का फैसला लिया गया। विपक्षी दल इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ SIR प्रक्रिया को वापस लेने और मतदाता सूची पुनरीक्षण को पारदर्शी बनाने की मांग उठाएंगे।

'मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव'

कांग्रेस की दिल्ली इकाई के महासचिव अनिल भारद्वाज ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है। उनके अनुसार, ऐसी कोई प्रक्रिया स्वीकार नहीं की जा सकती जिससे संभावित रूप से मतदाताओं के नाम हटने या उनके अधिकार प्रभावित होने की आशंका हो।

उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर का प्रदर्शन दिल्ली के मतदाताओं के अधिकारों, निष्पक्ष चुनाव और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए संयुक्त प्रयास होगा।

एक विवाद, लेकिन कई अलग-अलग घटनाक्रम

ज्ञानेश कुमार से जुड़ा मौजूदा विवाद दरअसल कई अलग-अलग घटनाक्रमों से बना है। एक तरफ SIR और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर विपक्ष तथा कुछ याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां हैं। दूसरी तरफ आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कथित तौर पर दर्ज की गई आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है। इसके अलावा 2006 के केरल PWD मामले की विजिलेंस जांच दोबारा शुरू होने से विवाद का एक अलग प्रशासनिक पहलू सामने आया है।इन सभी घटनाओं को एक-दूसरे से जोड़कर देखना फिलहाल उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर SIR विवाद और केरल के 2006 के मामले के बीच कोई प्रत्यक्ष कानूनी संबंध स्थापित नहीं हुआ है।

क्या है मामला और क्या अभी साबित नहीं हुआ?

- SIR को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद।

- चुनाव आयोग के भीतर मतभेद और लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट।

- Form-6 और चुनावी IT व्यवस्था को लेकर सवाल।

- सुप्रीम कोर्ट में संबंधित याचिकाएं।

- केरल में 2006 के मामले की विजिलेंस जांच दोबारा शुरू करने का आदेश।

  • दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन।
  • - 7 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के संयुक्त प्रदर्शन की घोषणा।

जो अभी अंतिम रूप से साबित नहीं हुआ है:

- चुनावी डेटा में किसी तरह की हेराफेरी।

- SIR के कारण जानबूझकर मतदाताओं के अधिकारों का उल्लंघन।

- 2006 के मामले में ज्ञानेश कुमार की किसी आपराधिक भूमिका का न्यायिक रूप से सिद्ध होना।

इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को आरोप, राजनीतिक विरोध, संस्थागत मतभेद और जांच के स्तर पर चल रही प्रक्रिया के रूप में देखना अधिक उचित है। आगे सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और केरल की विजिलेंस जांच से यह स्पष्ट होगा कि इन आरोपों और दावों का कानूनी आधार कितना मजबूत है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow