Kidney Disease Symptoms: किडनी फेलियर के चेतावनी संकेत: पैर में सूजन से लेकर बेहोशी तक,यहां देखिए लक्षण और उपाय
Kidney Failure Hindi News:किडनी फेलियर के शुरुआती चेतावनी संकेत जैसे पैरों में सूजन, पेशाब में बदलाव और थकान को पहचानें। AIIMS डॉक्टर से जानें जरूरी लक्षण और जांच
Kidney Disease Symptoms: किडनी फेलियर के चेतावनी संकेत: पैर में सूजन से लेकर बेहोशी तक,यहां देखिए लक्षण और उपाय
नई दिल्ली। किडनी की बीमारी अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिसके कारण मरीज समय रहते गंभीर स्थिति तक पहुंच जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जब तक लक्षण सामने आते हैं, तब तक किडनी की कार्यक्षमता काफी हद तक प्रभावित हो चुकी होती है। किडनी शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो दिनभर में लगभग 200 लीटर रक्त को फिल्टर करने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर नियंत्रण, पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन तथा रक्त निर्माण में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में इसकी कार्यक्षमता कम होने पर पूरे शरीर पर असर दिखने लगता है।
किडनी फेलियर के शुरुआती चेतावनी संकेत
डॉक्टरों के मुताबिक किडनी खराब होने से पहले शरीर कुछ महत्वपूर्ण संकेत देता है, जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है—
अचानक या लगातार ब्लड प्रेशर का बढ़ना, जो दवाओं से भी कंट्रोल न हो
,पेशाब में झाग या खून आना,
पेशाब की मात्रा कम होना या रात में बार-बार पेशाब लगना,
पैरों और आंखों के आसपास सूजन,
बिना कारण लगातार थकान और कमजोरी।
बढ़ने पर दिखते हैं गंभीर लक्षण
जैसे-जैसे किडनी की स्थिति बिगड़ती है, शरीर में और भी गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं—
लगातार थकान और कमजोरी जो आराम से भी ठीक न हो,
जी मिचलाना और भूख कम लगना,
मुंह में धातु जैसा स्वाद,
त्वचा का पीला पड़ना और अत्यधिक खुजली,
गंभीर स्थिति में बेहोशी या चक्कर आना
किडनी रोग की स्टेजिंग
किडनी की बीमारी को eGFR के आधार पर 5 स्टेज में बांटा जाता है—
स्टेज 1–2: शुरुआती डैमेज, अक्सर कोई लक्षण नहीं
स्टेज 3: किडनी कार्यक्षमता 40% से कम, हल्के लक्षण
स्टेज 4: 30% या उससे कम कार्यक्षमता, तत्काल इलाज जरूरी
स्टेज 5: किडनी फेलियर, डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत
कौन-सी जांच जरूरी है?
डॉक्टरों के अनुसार शुरुआती पहचान के लिए ये टेस्ट महत्वपूर्ण हैं—
सीरम क्रिएटिनिन टेस्ट,
eGFR टेस्ट,
यूरिन प्रोटीन टेस्ट,
ये जांच समय रहते कराने पर गंभीर स्थिति से बचाव संभव है।
किन लोगों को है ज्यादा खतरा?
किडनी रोग का खतरा इन स्थितियों में ज्यादा होता है—
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर,
परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास,
बार-बार किडनी स्टोन या यूरिन इंफेक्शन,
लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन.
विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी रोग को समय रहते पहचान लिया जाए तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन देर होने पर इलाज मुश्किल हो जाता है। इसलिए सूजन, पेशाब में बदलाव, थकान और बेहोशी जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अस्वीकरण: यह खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी लक्षण की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें,Indias news24 किसी तरह का दावा नहीं करता।
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