प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत मामला: 9 दिन बाद ट्रस्ट का बयान, पुलिस जांच में सहयोग का भरोसा
प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत के 9 दिन बाद केलि कुंज ट्रस्ट ने बयान जारी किया। ट्रस्ट ने पुलिस जांच में सहयोग और अफवाहों से बचने की अपील की।
प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत मामला: 9 दिन बाद ट्रस्ट का बयान, पुलिस जांच में सहयोग का भरोसा
वृंदावन। संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े श्री हित राधा केलि कुंज आश्रम के साधक दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में घटना के करीब नौ दिन बाद आश्रम ट्रस्ट की ओर से सार्वजनिक बयान जारी किया गया है। ट्रस्ट ने घटना पर दुख जताते हुए दिवंगत साधक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है और कहा है कि मामले की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच में पुलिस-प्रशासन को पूरा सहयोग दिया जा रहा है। ट्रस्ट ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज के माध्यम से श्रद्धालुओं और आम लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने तक अधूरी जानकारी, अफवाहों या अनुमानों के आधार पर आश्रम अथवा प्रेमानंद महाराज की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली बातें न फैलाएं।
25 सितंबर को हुई थी साधक की मौत
जानकारी के मुताबिक, 25 सितंबर को दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की गुरु कृपा कुंज परिसर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। मामले की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने के बाद पुलिस विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। बताया गया है कि मृतक मूल रूप से जबलपुर का रहने वाला था और करीब दो वर्ष पहले वृंदावन आया था। वह आश्रम से जुड़ी सेवा में कार्यरत था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई चोटों का उल्लेख
मृतक के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया 26 सितंबर को डॉक्टरों के पैनल द्वारा कराई गई थी। रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में सिर, पसलियों, टखने और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटों का जिक्र सामने आया है। पुलिस इन चिकित्सकीय तथ्यों और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को अपनी जांच का हिस्सा बना रही है। मौत की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
पुलिस ने कई लोगों से की पूछताछ
मामले की जांच कर रही पुलिस टीम ने आश्रम और आसपास से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की है। घटनास्थल से मिले इलेक्ट्रॉनिक एवं अन्य साक्ष्यों को भी जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले मृतक की गतिविधियां क्या थीं और किन परिस्थितियों में यह घटना हुई। जांच में मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है।
नौ दिन बाद क्यों आया ट्रस्ट का बयान?
घटना के बाद से यह मामला सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में बना हुआ था। ऐसे में घटना के करीब नौ दिन बाद ट्रस्ट की ओर से बयान जारी होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि ट्रस्ट ने अपने बयान में किसी आरोप पर प्रतिक्रिया देने के बजाय पुलिस जांच पर भरोसा जताया है। ट्रस्ट का कहना है कि जांच के माध्यम से ही घटना के वास्तविक तथ्य सामने आएंगे।
लापता श्रद्धालुओं के परिजनों के दावे से भी बढ़ी चर्चा
इसी बीच कुछ परिवारों द्वारा अपने परिजनों के लापता होने को लेकर आश्रम के बाहर पहुंचने और जानकारी मांगने की खबरें भी सामने आई हैं। इनमें कासगंज के एक नाबालिग सहित महाराष्ट्र और मथुरा क्षेत्र से जुड़े परिवारों के दावे बताए जा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि उनके लोग दर्शन के लिए वृंदावन आए थे, जिसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका। इन मामलों में पुलिस रिकॉर्ड और गुमशुदगी की शिकायतों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस ने लोगों से जांच में सहयोग की अपील की
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों के परिजन लापता हैं और उन्होंने गुमशुदगी दर्ज कराई है, वे पुलिस से संपर्क करें। पुलिस उपलब्ध जानकारी के आधार पर उनकी तलाश और सत्यापन की कार्रवाई करेगी।
फिलहाल इस पूरे मामले में दो प्रमुख पहलू जांच के केंद्र में हैं—साधक दीपक लोधी की मौत की परिस्थितियां और कुछ परिवारों द्वारा किए जा रहे लापता परिजनों की तलाश के दावे। दोनों मामलों में अंतिम तस्वीर पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
ट्रस्ट की अपील
ट्रस्ट ने अपने संदेश में कहा है कि घटना से प्रेमानंद महाराज और पूरा आश्रम परिवार आहत है। दिवंगत साधक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ट्रस्ट ने निष्पक्ष जांच में सहयोग का भरोसा दिया है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि जांच पूरी होने तक अपुष्ट सूचनाओं और अफवाहों को आगे न बढ़ाएं।
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