मझौली: झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से महिला की मौत, 4 दिन पहले युवक की गई थी जान
सीधी जिले के मझौली में झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से महिला की मौत, 4 दिन पहले युवक की भी गई थी जान। क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल।
मझौली: झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से महिला की मौत, 4 दिन पहले युवक की गई थी जान
रवि शुक्ला, मझौली। सीधी जिले के मझौली उपखंड क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला ग्राम जमुआ नंबर-1 का है, जहां एक महिला की कथित गलत इलाज के बाद मौत हो गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
परिजनों के अनुसार, ग्राम जमुआ नंबर-1 निवासी नीमिया केवट (35) को बुखार आने पर गांव के ही एक झोलाछाप डॉक्टर राधेश्याम गुप्ता से इलाज कराया गया। आरोप है कि डॉक्टर द्वारा लगाए गए इंजेक्शन के करीब एक घंटे के भीतर ही महिला की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार मृतक महिला के शरीर में इन्फेक्शन जैसे था उसके शरीर पर फफोले जैसे लक्षण भी दिखाई दिए, जिससे आशंका जताई जा रही है कि गलत दवा या रिएक्शन के कारण उसकी जान गई। मामले की शिकायत मझौली थाने में की गई है, जहां पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।पुलिस शव का पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है।
चार दिन पहले युवक की भी हो चुकी है मौत
मड़वास थाना क्षेत्र में चार दिन पहले भी एक युवक की संदिग्ध इलाज के चलते मौत हो चुकी है। मिली जानकारी के अनुसार कंजवार निवासी राजेश्वरी पाल की तबीयत खराब होने पर परिजनों ने गांव के ही एक व्यक्ति से दवा कराई थी। दवा लेने के कुछ ही समय बाद उसकी हालत बिगड़ गई। परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए जहां उसकी मौत हो गई। मृतक अपने परिवार का एक मात्र सहारा था उसके अन्य भाइयों की मौत पहले हो चुकी है, उसकी मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
लगातार हो रही इन घटनाओं ने मझौली क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। शासकीय अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण उन्हें मजबूरन झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है। बिना डिग्री और बिना विशेषज्ञता के ये लोग खुलेआम क्लीनिक संचालित कर रहे हैं, कुछ तो घर घर जाकर दवाई कर रहे हैं, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।
दो दर्जन बंगाली डॉक्टर बेधड़क कर रहे दवाई
मझौली उपखंड क्षेत्र अंतर्गत बंगाली डॉक्टर बिना किसी डिग्री के बेधड़क क्लीनिक खोल कर दवाई कर रहे हैं,यहां लगभग 2 दर्जन बंगाली डॉक्टर अपनी फर्जी दुकानें खोलकर लोगों के जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं,इसकी जानकारी भी जिम्मेदार अधिकारियों को भी है लेकिन कोई विशेष कार्यवाही नहीं हो रही है।
जिम्मेदार कौन?
लगातार हो रही मौतों के बाद अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इन घटनाओं का जिम्मेदार कौन है—स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन या जनप्रतिनिधि? मामला जो कुछ भी हो यह जांच का विषय है लेकिन अब देखना यह होगा कि इस घटना से जिम्मेदार क्या कुछ कार्यवाही करते हैं।
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