Reservation Controversy:आरक्षण पर सियासी संग्राम तेज: ‘UGC पर भी घमासान, जंतर मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी
Reservation Controversy:आरक्षण पर सियासी संग्राम तेज: ‘UGC पर भी घमासान, जंतर मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी
नई दिल्ली।
देश में इन दिनों आरक्षण को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है। एक तरफ जाति-आधारित आरक्षण के विरोध में प्रदर्शन तेज हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महिला आरक्षण को लेकर सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। दिल्ली, लखनऊ, पटना और जयपुर समेत कई शहरों में आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग उठ रही है, जिससे राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ गई है।
दिल्ली में प्रदर्शन, ‘सुधार’ की मांग
राजधानी दिल्ली में हजारों लोग आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे आरक्षण के खिलाफ नहीं, बल्कि उसमें सुधार चाहते हैं। उनका तर्क है कि लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) को भी समान अवसर मिले। इसके साथ ही ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने और मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाई गई।
क्या हैं प्रमुख मांगें?
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने ‘कोटा के भीतर कोटा’ लागू करने, एक परिवार को एक बार ही आरक्षण का लाभ देने और गरीब वर्गों को समान सहायता देने की बात कही। उनका कहना है कि कई जातियों को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है, ऐसे में सिस्टम की समीक्षा जरूरी है।
दलित नेताओं ने जताई कड़ी आपत्ति
आरक्षण विरोधी आवाजों पर सरकार में शामिल दलित नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान Chirag Paswan ने कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है और इसे खत्म करने की कोई कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं Ramdas Athawale (रामदास अठावले)ने ऐसे प्रदर्शनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विपक्ष का आरोप—‘आरक्षण खत्म करने की साजिश’
समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने कहा कि ‘आरक्षण सुधार’ के नाम पर इसे खत्म करने की साजिश रची जा रही है। वहीं Mayawati ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई मांग को देशहित के खिलाफ बताया।
Prakash Ambedkar और Chandrashekhar Azad ने भी आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाए जाने का आरोप लगाते हुए इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया।
बीजेपी और विपक्ष आमने-सामने
यूपी के उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak ने आंदोलन में शामिल छात्रों से मुलाकात कर उनकी मांगों को सुनने की बात कही और केंद्र तक पहुंचाने का भरोसा दिया। इस बीच आरएसएस प्रमुख Mohan Bhagwat ने भी कहा कि जब तक सामाजिक असमानता रहेगी, तब तक आरक्षण जरूरी है।
महिला आरक्षण पर भी छिड़ी बहस
आरक्षण विवाद के बीच महिला आरक्षण का मुद्दा भी गरमा गया है। बीजेपी नेता Smriti Irani ने कांग्रेस से महिला आरक्षण कानून का समर्थन करने की अपील की। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह पहले ही इस बिल का समर्थन कर चुकी है, लेकिन सरकार ने अब तक इसे लागू नहीं किया और इसे जनगणना व परिसीमन से जोड़ दिया है।
क्या है विवाद की जड़?
विपक्ष का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर लागू करने में देरी कर रही है। वहीं सरकार का कहना है कि उचित प्रक्रिया के तहत ही इसे लागू किया जाएगा। इसी बीच देश में आरक्षण को लेकर ‘सुधार बनाम अधिकार’ की बहस तेज हो गई है, जो आने वाले चुनावों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।
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