सीधी में नरवाई प्रबंधन के उन्नत कृषि यंत्रों की खरीद पर मिलेगा अनुदान,किसान ऑनलाइन करें आवेदन
सीधी में नरवाई प्रबंधन के उन्नत कृषि यंत्रों की खरीद पर मिलेगा अनुदान,किसान ऑनलाइन करें आवेदन
सीधी। जिले में फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन और रबी फसलों की समय पर बोनी को प्रोत्साहित करने के लिए शासन द्वारा उन्नत कृषि यंत्रों की खरीद पर अनुदान दिया जा रहा है। सहायक कृषि यंत्री ने बताया कि किसान सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और स्मार्ट सीडर जैसे कृषि यंत्रों का उपयोग कर नरवाई जलाने की समस्या से बच सकते हैं। इन यंत्रों से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने के साथ जुताई एवं बोनी की लागत कम करने में भी मदद मिलती है।
उन्होंने बताया कि सीधी जिले में खरीफ मौसम में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई के बाद खेतों में नरवाई बच जाती है। रबी फसलों की बोनी के लिए खेत तैयार करते समय कई बार किसान नरवाई जला देते हैं। इससे आसपास के खेतों में खड़ी फसलों में आग लगने का खतरा रहता है। साथ ही मिट्टी में मौजूद उपयोगी जीवों को नुकसान पहुंचता है, भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है और वायु प्रदूषण बढ़ता है। नरवाई प्रबंधन के उन्नत कृषि यंत्रों के उपयोग से इन समस्याओं को कम किया जा सकता है।
सुपर सीडर पर अधिकतम 1.20 लाख रुपये का अनुदान
सुपर सीडर यंत्र से खेत की जुताई और बीज की बोनी एक साथ की जा सकती है। यह नरवाई, पराली और फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाता है, जिससे वे कार्बनिक पदार्थ के रूप में मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में सहायक होते हैं। इस यंत्र से अगली फसल की समय पर बोनी संभव होती है। इसके उपयोग से पारंपरिक जुताई एवं बोनी की तुलना में लागत लगभग 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है। सुपर सीडर की खरीद पर शासन के नियमानुसार अधिकतम 1 लाख 20 हजार रुपये तक अनुदान का प्रावधान है। इस यंत्र से धान की सीधी बोनी (डीएसआर) भी की जा सकती है।
हैप्पी सीडर से खेत की नमी रहेगी बरकरार
हैप्पी सीडर जीरो टिलेज तकनीक पर आधारित कृषि यंत्र है। यह खेत में मौजूद नरवाई और पराली को काटकर सतह पर बिछाता है तथा बिना पारंपरिक जुताई के मिट्टी में चीरा लगाकर बीज की बोनी करता है। खेत में बिछी पराली मल्चिंग का कार्य करती है और मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद करती है। इससे फसल की बढ़वार के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं। इस यंत्र से पारंपरिक जुताई एवं बोनी की तुलना में लागत लगभग 60 प्रतिशत तक कम हो सकती है। हैप्पी सीडर की खरीद पर शासन के नियमानुसार अधिकतम 86 हजार 350 रुपये तक अनुदान दिया जाता है।
स्मार्ट सीडर से नरवाई प्रबंधन और बोनी एक साथ
स्मार्ट सीडर जीरो टिलेज तकनीक पर आधारित उन्नत कृषि यंत्र है। यह बीज बोने वाली कतार में आवश्यक जुताई करते हुए बीज की बोनी करता है और शेष क्षेत्र में नरवाई को खेत में दबाकर रखता है। इससे मिट्टी की नमी संरक्षित रखने में सहायता मिलती है। इस यंत्र के उपयोग से पारंपरिक जुताई एवं बोनी की तुलना में लागत लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है। स्मार्ट सीडर की खरीद पर शासन के नियमानुसार अधिकतम 90 हजार 200 रुपये तक अनुदान का प्रावधान है।
ऑनलाइन आवेदन के लिए इन दस्तावेजों की होगी आवश्यकता
सहायक कृषि यंत्री ने बताया कि इच्छुक किसान ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए किसान के स्वयं के नाम की भूमि की बी-1, बैंक पासबुक, ट्रैक्टर की आरसी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों के लिए जाति प्रमाण पत्र आवश्यक होगा। इसके अतिरिक्त आवेदक के स्वयं के बैंक खाते से 4,500 रुपये की धरोहर राशि का डिमांड ड्राफ्ट भी आवश्यक है। विभाग को प्राप्त आवेदनों के आधार पर लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा। इसके बाद लॉटरी संबंधी सूचना प्रकाशित कर अनुदान वितरण के लिए शासन के नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
किसानों से उन्नत तकनीक अपनाने की अपील
सहायक कृषि यंत्री ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे नरवाई जलाने के बजाय उसके उचित प्रबंधन के लिए उन्नत कृषि यंत्रों का उपयोग करें। सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और स्मार्ट सीडर के माध्यम से फसल अवशेषों का प्रबंधन करते हुए समय पर बोनी करें, खेती की लागत कम करें और फसल उत्पादकता एवं आय बढ़ाने की दिशा में कदम उठाएं।
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