मड़वास तहसीलदार वेदवती सिंह की कहानी, संघर्ष से बनीं अधिकारी

सीधी जिले के मड़वास में पदस्थ तहसीलदार वेदवती सिंह ने छात्रावास में रहकर पढ़ाई की और कई असफलताओं के बाद MPPSC में सफलता हासिल की। जानिए उनकी प्रेरक कहानी।

Oct 26, 2026 - 16:46
 0  341
मड़वास तहसीलदार वेदवती सिंह की कहानी, संघर्ष से बनीं अधिकारी
तहसीलदार वेदवती सिंह की संघर्ष से सफलता तक की कहानी(photo:Vedvati singh)

मड़वास तहसीलदार वेदवती सिंह की कहानी, संघर्ष से बनीं अधिकारी

सीधी, रवि शुक्ला। जीवन की राह में आने वाली कठिनाइयां जब हौसलों की परीक्षा लेती हैं, तब कुछ लोग परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देते हैं, जबकि कुछ अपने संकल्प की शक्ति से उन्हीं कठिनाइयों को सफलता की सीढ़ी बना लेते हैं। तहसीलदार वेदवती सिंह की जीवन यात्रा ऐसी ही संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की प्रेरक गाथा है। छात्रावास में रहकर शिक्षा प्राप्त करने से लेकर मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की कठिन प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल करने और प्रशासनिक सेवा में अपनी पहचान स्थापित करने तक का उनका सफर उन बेटियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने संजोती हैं।

मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले की जैतहरी तहसील के एक साधारण परिवार में जन्मीं वेदवती सिंह ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर वह मुकाम हासिल किया, जिसके लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। आदिवासी बाहुल्य और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे क्षेत्र से निकलकर प्रशासनिक अधिकारी बनने तक की उनकी यात्रा इस विश्वास को मजबूत करती है कि सफलता का रास्ता सुविधाओं से नहीं, बल्कि संकल्प और निरंतर परिश्रम से प्रशस्त होता है। वर्तमान में वे सीधी जिले के मड़वास में तहसीलदार के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं।

 असफलताओं ने परखा हौसला,लेकिन तोड़ नहीं सकीं संकल्प

वेदवती सिंह के पिता कोयला खदान में चतुर्थ श्रेणी में नौकरी करते हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। साधारण पारिवारिक परिवेश में पली-बढ़ीं वेदवती ने बचपन से ही शिक्षा को अपने जीवन का आधार बनाया। प्रारंभिक और माध्यमिक स्तर तक की पढ़ाई उन्होंने परिवार के साथ रहते हुए पूरी की। इसके बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें घर-परिवार से दूर शहडोल जिले के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्रावास में रहना पड़ा।

परिवार से दूर रहकर पढ़ाई करना, अपनी दिनचर्या स्वयं संभालना और भविष्य के प्रति सजग रहना आसान नहीं था। फिर भी उन्होंने परिस्थितियों को अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया। छात्रावास का अनुशासित जीवन और शिक्षा के प्रति उनकी निष्ठा आगे चलकर उनके व्यक्तित्व की मजबूत नींव बने। इसके बाद उन्होंने बुढ़ार कॉलेज से स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी की। पढ़ाई के इसी सफर में उनके मन में प्रशासनिक सेवा में पहुंचकर समाज और शासन के बीच अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प और प्रबल होता गया।

 एमपीपीएससी को बनाया जीवन का लक्ष्य

उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद वेदवती सिंह ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की परीक्षा को अपना लक्ष्य बनाया। वर्ष 2013 से 2016 के बीच उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पूरी तन्मयता से समय लगाया। सीमित संसाधनों के बीच अध्ययन, आत्मानुशासन और निरंतर अभ्यास के सहारे वह अपने सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ती रहीं। इसी दौरान उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग में पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) के पद पर नौकरी मिली। उन्होंने वर्ष 2017 से 2018 तक इस पद पर कार्य किया। नौकरी मिलने के बाद भी उनके भीतर प्रशासनिक सेवा में उच्च पद हासिल करने की आकांक्षा कम नहीं हुई। उन्होंने अपने लक्ष्य को अधूरा छोड़ने के बजाय तैयारी जारी रखने का निर्णय लिया। यह उनके व्यक्तित्व की वही विशेषता थी, जिसने आगे चलकर उन्हें सफलता के मुकाम तक पहुंचाया।

 असफलताओं ने परखा हौसला, लेकिन तोड़ नहीं सकीं संकल्प

प्रतियोगी परीक्षाओं का सफर अक्सर धैर्य और आत्मविश्वास की कठिन परीक्षा लेता है। वेदवती सिंह के लिए भी यह राह आसान नहीं रही।घर पर रहकर तैयारी की, वर्ष 2014 से 2016 के बीच उन्होंने एमपीपीएससी की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं में भाग लिया, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। मुख्य परीक्षा में सफलता नहीं मिलने के कारण वह साक्षात्कार तक नहीं पहुंच पाईं।

लगातार प्रयासों के बावजूद परिणाम पक्ष में न आने पर निराशा स्वाभाविक थी, लेकिन उन्होंने असफलता को अपनी नियति मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने अपनी कमियों को समझा, तैयारी की रणनीति में सुधार किया और नए उत्साह के साथ लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए।

वेदवती सिंह ने मुख्य परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए जबलपुर का रुख किया। वर्ष 2017 में उन्होंने मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण कर पहली बार साक्षात्कार तक पहुंचने में सफलता हासिल की। हालांकि, पहले साक्षात्कार में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उनका आत्मविश्वास डगमगाया नहीं। उन्होंने पुनः प्रयास किया और वर्ष 2018 में साक्षात्कार में शामिल हुईं। अंततः उनके वर्षों के परिश्रम और धैर्य का प्रतिफल मिला तथा प्रशासनिक सेवा में चयन का सपना साकार हुआ।

उनकी यह यात्रा बताती है कि असफलता किसी मंजिल का अंत नहीं होती, बल्कि स्वयं को और बेहतर बनाने का अवसर होती है। जो व्यक्ति अपनी कमियों से सीखकर लगातार आगे बढ़ता है, उसके लिए सफलता की संभावनाएं बनी रहती हैं।

आखिरकार वर्ष 2019 में उन्हें नायब तहसीलदार के पद पर पहली नियुक्ति मिली। यह उपलब्धि केवल एक सरकारी पद प्राप्त करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन तमाम संघर्षों, त्याग और प्रयासों की परिणति थी, जिन्हें उन्होंने वर्षों तक अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखा। नायब तहसीलदार के रूप में विभिन्न तहसीलों में सेवाएं देते हुए उन्होंने प्रशासनिक कार्यों का अनुभव अर्जित किया और अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में आगे बढ़ती रहीं।

 पारिवारिक जीवन के साथ प्रशासनिक दायित्वों का संतुलन

वेदवती सिंह का विवाह शहडोल जिले के जयसिंहनगर क्षेत्र के गोहपारू निवासी पवन सिंह के साथ हुआ। विवाह के समय पवन सिंह पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत थे। वर्तमान में वह थाना प्रभारी के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। वहीं, वेदवती सिंह ने भी प्रशासनिक सेवा में अपनी यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाया और अब सीधी जिले के मड़वास में तहसीलदार के पद पर पदस्थ हैं। दोनों अपने-अपने विभागों में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। यह उनके व्यक्तिगत परिश्रम, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

 बेटियों के सपनों को पंख देती है वेदवती सिंह की कहानी

वेदवती सिंह की सफलता की कहानी केवल एक महिला अधिकारी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने भविष्य को संवारने का सपना देखती हैं। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयासों में निरंतरता बनी रहे, तो सफलता की राह निकाली जा सकती है। असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीखना, अपने आत्मविश्वास को बनाए रखना और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना ही उनकी उपलब्धि का मूल मंत्र रहा है। आज मड़वास में तहसीलदार के रूप में जिम्मेदारी निभा रहीं वेदवती सिंह उन परिवारों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं, जो अपनी बेटियों को शिक्षित, आत्मनिर्भर और सफल देखना चाहते हैं। उनकी जीवनगाथा इस विश्वास को और दृढ़ करती है कि सपनों की ऊंचाई परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए किए गए संघर्ष और संकल्प से तय होती है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Ravi Shukla रवि शुक्ला एक अनुभवी ग्राउंड रिपोर्टर हैं, दैनिक अखबारों और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है.रवि शुक्ला की मुख्य विशेषज्ञता हाइपर लोकल क्राइम, क्षेत्रीय राजनीति, प्रशासनिक,शिक्षा, फैसलों और ग्रामीण विषयों (खेती-किसानी) की ग्राउंड जीरो से तथ्यपरक रिपोर्टिंग करने में अच्छा अनुभव है।