मड़वास: छात्राओं से मारपीट,अभद्रता और अश्लील टिप्पणी करने वाला शिक्षक निलंबित
शराब के नशे में स्कूल पहुंचने, छात्र-छात्राओं को मुर्गा बनाने और मारपीट करने का आरोप; मड़वास थाने में दर्ज है एफआईआर, जिला शिक्षा अधिकारी ने जारी किया निलंबन आदेश
मड़वास: छात्राओं से मारपीट,अभद्रता और अश्लील टिप्पणी करने वाला शिक्षक निलंबित
सीधी। जिले के मझौली विकासखंड अंतर्गत शासकीय माध्यमिक विद्यालय धनौर में छात्र-छात्राओं के साथ कथित मारपीट और अभद्र व्यवहार के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने प्राथमिक शिक्षक कमलेश कुमार रावत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शिक्षक पर विद्यालय में शराब के नशे में पहुंचने, छात्र-छात्राओं को अश्लील गालियां देने, मारपीट करने और छात्राओं के बाल पकड़कर खींचने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में मड़वास थाने में एफआईआर भी दर्ज की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सीधी से 29 अक्टूबर 2026 को जारी निलंबन आदेश के अनुसार, घटना 16 अक्टूबर 2026 की बताई गई है। शासकीय माध्यमिक विद्यालय धनौर के प्रधानाध्यापक कल्याण प्रसाद साकेत ने 17 अक्टूबर को संकुल प्राचार्य को लिखित प्रतिवेदन देकर शिकायत की थी कि प्राथमिक शिक्षक कमलेश कुमार रावत शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने कक्षा 6वीं और 7वीं में पहुंचकर बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार किया। कुछ समय बाद कक्षा 8वीं की छात्राओं ने बच्चों के रोने की आवाज सुनने और उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने की जानकारी दी।
छात्राओं और अभिभावकों ने थाने में दर्ज कराई शिकायत
मामले में छात्राओं और उनके अभिभावकों ने 17 अक्टूबर को मड़वास थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा छठवीं की एक छात्रा ने बताया कि शिक्षक कमलेश रावत कथित तौर पर शराब के नशे में विद्यालय आए थे और उन्होंने अन्य बच्चों के साथ भी गाली-गलौज एवं मारपीट की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि शिक्षक ने बच्चों को मुर्गा बनाकर बैठाया, कुछ छात्राओं के बाल पकड़कर खींचे और उन्हें घर जाकर घटना की जानकारी अपने माता-पिता को नहीं देने की बात कही। बच्चों की शिकायत के बाद अभिभावकों ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की। मड़वास थाना पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 519/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 296(बी), 115(2) एवं किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया है।
शिक्षक ने आरोपों को बताया निराधार, ग्रामीणों पर लगाए गंभीर आरोप
दूसरी ओर, शिक्षक कमलेश कुमार रावत ने अपने लिखित अभिकथन में आरोपों को अलग रूप देते हुए ग्रामीणों पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने विकासखंड समन्वयक के समक्ष प्रस्तुत जवाब में कहा कि 16 अक्टूबर को विद्यालय आते समय कुछ ग्रामीणों ने उन्हें रास्ते में रोककर पैसों की मांग की थी। उनके अनुसार ग्रामीण शराब के नशे में थे और उन्होंने गाली-गलौज करते हुए नौकरी में परेशानी खड़ी करने की धमकी भी दी थी।
शिक्षक ने अपने पक्ष में कहा कि कक्षा में अधिक शोर-शराबा होने के कारण उन्होंने बच्चों को ऊंचे स्वर में डांटा था, जिससे बच्चियां भावुक होकर रोने लगीं। उनका कहना है कि किसी भी छात्र-छात्रा को भयभीत करने, अपमानित करने या शारीरिक दंड देने की उनकी मंशा नहीं थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्राओं ने घर जाकर घटना को बढ़ा-चढ़ाकर बताया, जिसके कारण अभिभावक उग्र हो गए। शिक्षक ने निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की थी।
कारण बताओ नोटिस के बाद जारी हुआ निलंबन आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आदेश के मुताबिक, प्रधानाध्यापक, जनपद शिक्षा केंद्र मझौली के प्रतिवेदन और मड़वास थाना प्रभारी की रिपोर्ट के आधार पर शिक्षक को 22 अक्टूबर 2026 को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया था। प्रस्तुत अभिलेखों और प्रतिवेदनों के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षक का कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के उपनियम (1), (2) एवं (3) के विपरीत मानते हुए गंभीर कदाचरण की श्रेणी में रखा। इसके बाद मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए कमलेश कुमार रावत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा कार्यालय सीधी निर्धारित किया गया है। साथ ही नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
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