संजय टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की मौत और पेड़ों की कटाई पर सवाल, वन सभापति ने लगाए गंभीर आरोप

संजय टाइगर रिजर्व में बाघ-हाथियों की मौत और पेड़ों की कटाई को लेकर वन सभापति कृष्ण लाल पयासी ने गंभीर आरोप लगाए। वन्यजीव सुरक्षा बजट के ऑडिट और उच्चस्तरीय जांच की मांग।

Sep 23, 2026 - 17:13
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संजय टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की मौत और पेड़ों की कटाई पर सवाल, वन सभापति ने लगाए गंभीर आरोप
संजय टाइगर रिजर्व में मौत और कटाई का मामला गरमाया

संजय टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की मौत और पेड़ों की कटाई पर सवाल, वन सभापति ने लगाए गंभीर आरोप

रवि शुक्ला,मझौली । संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघों और हाथियों की मौत तथा जंगल में पेड़ों की कटाई को लेकर वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। जिला पंचायत सदस्य एवं वन स्थायी समिति के सभापति कृष्ण लाल पयासी ने टाइगर रिजर्व प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए पिछले वर्षों में हुई वन्यजीवों की मौतों की उच्चस्तरीय जांच और वन्यजीव सुरक्षा बजट के स्वतंत्र ऑडिट की मांग की है।

करंट और कुएं में गिरने से वन्यजीवों की मौत का दावा

कृष्ण लाल पयासी के मुताबिक, मार्च 2023 में टमसार क्षेत्र में बाघ T-32 की करंट लगने से मौत हुई थी। इसके बाद अगस्त 2025 में डुबरी क्षेत्र में बाघ T-3 की करंट से मौत का मामला सामने आया। दिसंबर 2025 में इसी क्षेत्र में दो बाघ शावकों की भी करंट लगने से मौत होने का दावा किया गया है। उन्होंने बताया कि 5 सितंबर 2026 को बोदारी-मझौली क्षेत्र में एक बाघ की खुले कुएं में गिरने से मौत हुई। वहीं सितंबर 2026 में मलकपुर क्षेत्र में एक मादा हाथी की करंट लगने से मौत की घटना भी सामने आने का दावा किया गया है। इन घटनाओं को लेकर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे इंतजामों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ क्षेत्रों में खुले बिजली तार, कमजोर निगरानी और गश्ती व्यवस्था की कमी के कारण वन्यजीवों के लिए खतरा बना हुआ है।

वन्यजीव सुरक्षा बजट के ऑडिट की मांग

वन सभापति कृष्ण लाल पयासी का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत होता है। इसमें गश्ती, कॉरिडोर प्रबंधन, सोलर फेंसिंग और निगरानी जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। उनका आरोप है कि इन व्यवस्थाओं का अपेक्षित असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने पिछले दो वर्षों में हुई बाघ और हाथियों की मौतों की श्वेत पत्र के माध्यम से जांच कराने और वन्यजीव सुरक्षा के लिए खर्च की गई धनराशि का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है।

अधिकारियों के फील्ड विजिट पर भी सवाल

श्री पयासी ने आरोप लगाया कि कई बार संबंधित अधिकारी क्षेत्र का पर्याप्त फील्ड निरीक्षण नहीं करते और घटनाओं के बाद औपचारिक कार्रवाई तक मामला सीमित रह जाता है। उन्होंने गश्ती व्यवस्था में भी कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है।उनका कहना है कि यदि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो संजय टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

संजय टाइगर रिजर्व में पेड़ों की कटाई का भी आरोप

वन्यजीवों की मौत के अलावा संजय टाइगर रिजर्व के दुबरी क्षेत्र उमरिया के चिंनगवाह बीट में पेड़ों की कटाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हाल ही में उरमिया गांव के एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा एक वीडियो वायरल कर बताया था कि हरे भरे कीमती पेड़ों को काटकर बाड़ी बनाया जाता है जबकि संजय टाइगर रिजर्व में पेड़ों की कटाई नहीं की जा सकती । उसी को लेकर खबर भी प्रकाशन किया गया था वीडियो के माध्यम से आरोप लगाया गया था कि दुबरी रेंज के चिन्हगवाह बीट क्षेत्र में हरे-भरे और कीमती पेड़ों की कटाई कर वहां बाड़ी तैयार की जा रही है।

स्थानीय व्यक्ति ने इस मामले में जांच और कार्रवाई की मांग की थी। अब इसी मामले को लेकर जिला पंचायत सदस्य कृष्ण लाल पयासी से सवाल किए जाने पर उन्होंने भी संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पेड़ों की कथित कटाई को गंभीर मामला बताया।उन्होंने कहा की कीमती पेड़ों की कटाई अभी हाल ही में उमरिया में की गई थी जिससे सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान होता है,जिम्मेदार अधिकारी क्षेत्र में कभी भ्रमण नहीं करते हैं।

'हरे-भरे पेड़ों की कटाई से सरकार को नुकसान'

कृष्ण लाल पयासी ने आरोप लगाया कि संजय टाइगर रिजर्व में कथित तौर पर मनमाने तरीके से हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान होता है। उनका यह भी आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों का नियमित फील्ड भ्रमण नहीं होता और कई इलाकों की निगरानी छोटे कर्मचारियों के भरोसे रहती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, वन्यजीवों की मौत के कारणों की समीक्षा करने और पेड़ों की कटाई के आरोपों की जांच के साथ जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

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Ravi Shukla रवि शुक्ला एक अनुभवी ग्राउंड रिपोर्टर हैं, दैनिक अखबारों और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है.रवि शुक्ला की मुख्य विशेषज्ञता हाइपर लोकल क्राइम, क्षेत्रीय राजनीति, प्रशासनिक,शिक्षा, फैसलों और ग्रामीण विषयों (खेती-किसानी) की ग्राउंड जीरो से तथ्यपरक रिपोर्टिंग करने में अच्छा अनुभव है।