मझौली:शिक्षक शैलेन्द्र प्रताप सिंह को मिलेगा राष्ट्रपति पुरस्कार,राष्ट्रपति के हाथों होगा सम्मान
शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कंजवार के माध्यमिक शिक्षक (अंग्रेजी) एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक शैलेन्द्र प्रताप सिंह का नेशनल टीचर अवॉर्ड-2026 के लिए चयन हुआ है। देशभर से चयनित 48 शिक्षकों में शैलेन्द्र प्रताप सिंह मध्यप्रदेश से चयनित दो शिक्षकों में शामिल हैं
मझौली:शिक्षक शैलेन्द्र प्रताप सिंह को मिलेगा राष्ट्रपति पुरस्कार,राष्ट्रपति के हाथों होगा सम्मान
सीधी
जिले के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कंजवार के माध्यमिक शिक्षक (अंग्रेजी) एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक शैलेन्द्र प्रताप सिंह का नेशनल टीचर अवॉर्ड-2026 के लिए चयन हुआ है। देशभर से चयनित 48 शिक्षकों में शैलेन्द्र प्रताप सिंह मध्यप्रदेश से चयनित दो शिक्षकों में शामिल हैं। उन्हें 5 सितंबर 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र के एक सरकारी विद्यालय को जनभागीदारी, नवाचार और समावेशी शिक्षा के माध्यम से नई पहचान दिलाने के उनके प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर यह महत्वपूर्ण मान्यता मिली है।
11 विद्यार्थियों से शुरू हुई शिक्षकीय यात्रा
शैलेन्द्र प्रताप सिंह की शिक्षकीय यात्रा 22 अक्टूबर 2011 को शासकीय प्राथमिक शाला अगरियान टोला कंजवार में प्रथम पदस्थापना से शुरू हुई। उस समय विद्यालय में मात्र 11 विद्यार्थी नामांकित थे और इनमें भी केवल तीन विद्यार्थी उपस्थित थे। जर्जर भवन, सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने पिता, जो स्वयं शिक्षक थे, से प्रेरणा लेकर शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाने का संकल्प लिया। निरंतर प्रयासों से विद्यालय का नामांकन 11 से बढ़कर 121 तक पहुंचा। विद्यार्थियों ने जवाहर नवोदय विद्यालय तथा विभिन्न ओलिंपियाड परीक्षाओं में सफलता हासिल की।
जर्जर विद्यालय को जनभागीदारी से बनाया आकर्षक
13 अगस्त 2024 को शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कंजवार में प्रभारी प्रधानाध्यापक का दायित्व संभालने के समय विद्यालय जर्जर भवन, सीमित सुविधाओं, अस्वच्छ परिसर और घटते सामुदायिक विश्वास जैसी चुनौतियों से जूझ रहा था। शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने ग्रामवासियों, पालकों, विद्यालय प्रबंधन समिति और जनप्रतिनिधियों को विद्यालय विकास से जोड़ते हुए जनभागीदारी अभियान शुरू किया। इसके परिणामस्वरूप लगभग 5 लाख रुपये का सहयोग प्राप्त हुआ। इस सहयोग से लगभग 900 फीट बाउंड्री वॉल, पेयजल व्यवस्था, भवन मरम्मत, रंगाई-पुताई और फर्नीचर सहित विभिन्न कार्य कराए गए। विद्यालय के नवीन भवन के लिए 51 लाख रुपये तथा विधायक निधि से 25 लाख रुपये की स्वीकृति भी प्राप्त हुई।
नामांकन और उपस्थिति में आया बड़ा बदलाव
विद्यालय में किए गए प्रयासों का सीधा असर विद्यार्थियों की संख्या और नियमित उपस्थिति पर दिखाई दिया। नामांकन 69 से बढ़कर 202, बालिकाओं की संख्या 36 से बढ़कर 107 तथा नियमित उपस्थिति 44 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत हो गई। विद्यालय से बाहर हो चुके 26 ड्रॉपआउट विद्यार्थियों का पुनः नामांकन कराया गया और विद्यालय र्को मतव क्तवचवनज बनाया गया।
दिव्यांग विद्यार्थी कुशल कुमार मिश्रा को विद्यालय तक पहुंचाने में व्यक्तिगत सहयोग देकर उन्होंने समावेशी शिक्षा को व्यवहार में उतारा। विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए बाल संसद और साप्ताहिक छात्र प्रधानाध्यापक जैसी अभिनव व्यवस्थाएं शुरू की गईं। इन प्रयासों का परिणाम रहा कि दो विद्यार्थियों का जवाहर नवोदय विद्यालय और दो विद्यार्थियों का सैनिक विद्यालय में चयन हुआ।
500 टीएलएम से लेकर फत् आधारित शिक्षण तक
शिक्षण को आनंददायी और अनुभवात्मक बनाने के लिए विद्यालय में लगभग 500 टीएलएम, थ्स्छ बगीचा, फत् आधारित शिक्षण, बिरसा मुंडा उद्यान और पोषण वाटिका विकसित की गई। छात्राओं की सुविधा के लिए व्यक्तिगत वेतन से सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और इन्सिनरेटर की व्यवस्था की गई।
विद्यालय को सीखने के साथ-साथ पर्यावरण और सामाजिक संवेदनशीलता का केंद्र बनाने के लिए 1336 पौधों का रोपण, लगभग 400 निराश्रित मवेशियों के लिए रिफ्लेक्टिव कॉलर तथा पक्षियों के लिए दाना-पानी की स्थायी व्यवस्था की गई।
शिक्षण के साथ व्यावसायिक विकास में भी योगदान
शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने व्यावसायिक विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने दो प्ैठछ युक्त पुस्तकों का लेखन-प्रकाशन किया तथा छह क्रियात्मक शोध किए। राज्य एवं जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर के रूप में भी उन्होंने शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया।
इन कार्यों के लिए उन्हें राज्यपाल, मध्यप्रदेश द्वारा राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान, कलेक्टर सीधी द्वारा Star of the Month तथा विश्वामित्र आदर्श शिक्षक सम्मान सहित विभिन्न सम्मानों से नवाजा जा चुका है। ग्रामवासियों द्वारा 1008 दीप प्रज्वलित कर किया गया सम्मान उनके लिए जनविश्वास और सामाजिक स्वीकृति का विशेष प्रतीक रहा है।
सरकारी विद्यालयों के लिए अनुकरणीय मॉडल
शैलेन्द्र प्रताप सिंह का मानना है कि शिक्षक का वास्तविक सम्मान पुरस्कारों में नहीं, बल्कि बच्चों, विद्यालय और समाज के जीवन में आए स्थायी सकारात्मक परिवर्तन में निहित है। कंजवार विद्यालय में किए गए उनके प्रयासों ने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों वाले सरकारी विद्यालयों में भी जनभागीदारी, नवाचार, समावेशी शिक्षा और शिक्षक की प्रतिबद्धता से व्यापक बदलाव संभव है।
11 विद्यार्थियों से शुरू हुई शिक्षकीय यात्रा का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार तक पहुंचना सीधी के लिए गौरव की उपलब्धि है। 5 सितंबर को राष्ट्रपति के हाथों मिलने वाला राष्ट्रीय सम्मान न केवल शैलेन्द्र प्रताप सिंह की व्यक्तिगत उपलब्धियों को सम्मानित करेगा, बल्कि कंजवार के विद्यार्थियों, अभिभावकों, ग्रामवासियों और उस सामुदायिक भागीदारी को भी राष्ट्रीय पहचान देगा, जिसने एक सरकारी विद्यालय के कायाकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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