मझौली: गिजवार पंचायत में मनरेगा और ग्राम विकास की राशि चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट,कागजों में संचालित दुकानों के नाम पर लाखों रुपए कर दिए भुगतान
एक निर्माण कार्य के नाम पर कई कार्यों की राशि निकालने का आरोप, कागजों में संचालित दुकान के नाम पर लाखों का भुगतान; भूमिहीनों के नाम कपिलधारा कूप और खेत तालाब निर्माण भी जांच के घेरे में
मझौली: गिजवार पंचायत में मनरेगा और ग्राम विकास की राशि चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट,कागजों में संचालित दुकानों के नाम पर लाखों रुपए कर दिए भुगतान
सीधी। जनपद पंचायत मझौली अंतर्गत ग्राम पंचायत गिजवार में मनरेगा और ग्राम विकास योजनाओं के तहत कराए गए निर्माण कार्यों तथा भुगतान को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कागजों पर कई निर्माण कार्य दर्शाकर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि मौके पर संबंधित कार्य अस्तित्व में नहीं हैं। वहीं, जिस दुकान के नाम पर लाखों रुपये के बिलों का भुगतान किया गया, ग्रामीणों के मुताबिक गिजवार में उस नाम से कोई दुकान संचालित ही नहीं है। मामले में निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति, मूल्यांकन, सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्य वास्तव में नहीं हुए तो उनकी प्रगति और पूर्णता का सत्यापन किस आधार पर किया गया? इस पूरे मामले में निर्माण एजेंसी के साथ तकनीकी अमले की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की जा रही है।
मनरेगा के नौ कार्यों के नाम पर 20 लाख से अधिक भुगतान का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार मनरेगा योजना के तहत पंचायत में मेढ़ बंधान, डग पॉन्ड और खेत तालाब निर्माण सहित कई कार्य स्वीकृत एवं पूर्ण दर्शाए गए हैं। इनमें कृष्ण कुमार पिता रोहिणी प्रसाद मिश्रा के खेत में मेढ़ बंधान, अशोक पिता अनुसुइया के घर के पास डग पॉन्ड, अनुसुइया के घर के पास डग पॉन्ड, अशोक के घर के पास डग पॉन्ड, फुलवहा बांध और बैरिहाई बांध के पास डग पॉन्ड निर्माण शामिल हैं।इसके अलावा राजेंद्र पिता चूड़ामणि मिश्रा, अनुसुइया प्रसाद तथा रोहिणी पिता रामराज मिश्रा के खेत में खेत तालाब निर्माण के नाम पर भी राशि भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।
ग्रामीणों का दावा है कि इन सभी कार्यों के नाम पर 20 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया गया, लेकिन मौके पर इन विभिन्न निर्माण कार्यों के बजाय केवल एक आयताकार बावली का निर्माण दिखाई देता है। यदि यह दावा सही है तो यह जांच का विषय है कि जिन कार्यों के नाम पर सरकारी राशि खर्च दिखाई गई, वे वास्तव में कहां और किस स्थिति में निर्मित हुए हैं।
भूमिहीनों के नाम पर कपिलधारा कूप और खेत तालाब
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। ग्रामीणों के मुताबिक हितग्राही प्रभा पति सच्चिदानंद मिश्रा के नाम कपिलधारा कूप निर्माण तथा बालेंद्र पिता सच्चिदानंद मिश्रा के नाम मेढ़ बंधान का कार्य दर्शाया गया है, जबकि दोनों हितग्राहियों को भूमिहीन बताया जा रहा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि संबंधित हितग्राही भूमिहीन हैं तो उनके नाम पर खेत से संबंधित निर्माण कार्य किस भूमि पर स्वीकृत किए गए और उनका भौतिक सत्यापन किस आधार पर किया गया? इस बिंदु पर राजस्व अभिलेखों और मनरेगा के दस्तावेजों का मिलान आवश्यक है।
जिस दुकान के नाम पर लाखों का भुगतान, वह मौके पर नहीं!
ग्राम विकास के बजट के भुगतान को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पांचवें राज्य वित्त आयोग मद एवं अन्य मदों से प्राप्त राशि में से सुरेश ट्रेडर्स, गिजवार के नाम पर लाखों रुपये के बिलों का भुगतान किया गया, जबकि गांव में इस नाम से कोई दुकान संचालित नहीं है। शिकायतकर्ता राजेश पांडेय ने आरोप लगाया है कि पंचायत सचिव श्यामलाल केवट द्वारा अपने सगे-संबंधी को वेंडर बनाकर भुगतान कराया गया। हालांकि, इस आरोप की पुष्टि संबंधित वेंडर के अभिलेखों, बिलों, जीएसटी विवरण और भुगतान दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
22 बिलों के भुगतान में 68,580 रुपये का अंतर!
भुगतान संबंधी दस्तावेजों का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता ने एक अन्य गंभीर विसंगति भी उठाई है। उनके मुताबिक ई-पेमेंट क्रमांक 3951227, दिनांक 19 जुलाई 2026 के तहत कुल 22 बिलों के लिए 2,38,266 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है, जबकि उन 22 बिलों की कुल राशि 1,69,686 रुपये बैठती है। इस तरह दोनों राशियों के बीच 68,580 रुपये का अंतर बताया गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित भुगतान की मूल बिल प्रतियां, वाउचर, बैंक ट्रांजेक्शन और लेखा अभिलेखों का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
निजी पट्टे की जमीन पर तीन पीसीसी सड़क निर्माण का आरोप
ग्रामीणों ने पंचायत द्वारा निजी पट्टे की भूमि पर तीन पीसीसी सड़कों का निर्माण कराए जाने का आरोप भी लगाया है। इनमें मेन मस्जिद से कब्रिस्तान तक, वार्ड क्रमांक 10 में राममिलन यादव के घर से शिवरतन पनिका के घर तक तथा तेजभान सिंह के घर से कमलेश चतुर्वेदी के घर तक सड़क निर्माण शामिल है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि ये सड़कें निजी पट्टे की जमीन पर बनाई गई हैं तो इनके निर्माण की स्वीकृति किस आधार पर दी गई? क्या संबंधित भूमि के स्वामित्व और सार्वजनिक उपयोग की स्थिति का परीक्षण किया गया था?
आरटीआई में गलत जानकारी देने का आरोप
शिकायतकर्ता ग्रामीण राजेश पांडेय ने बताया कि उन्होंने ग्राम पंचायत में कथित अनियमितताओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन दिया था। उनका आरोप है कि वास्तविक जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय गलत जानकारी दी गई, जिसके संबंध में उन्होंने शिकायत भी दर्ज कराई है।
राजेश पांडेय ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि पंचायत में मनरेगा और ग्राम विकास मद से कराए गए सभी निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही भुगतान किए गए बिलों, हितग्राहियों की पात्रता और वेंडर की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सीईओ ने कहा- जांच कराएंगे, गड़बड़ी मिलने पर होगी कार्रवाई
मामले को लेकर जनपद पंचायत मझौली की सीईओ सुरभि श्रीवास्तव ने कहा कि यदि इस तरह का फर्जीवाड़ा किया गया है तो जांच टीम गठित की जाएगी। वह स्वयं भी मौके पर जाकर जांच करेंगी। जांच में अनियमितता या फर्जीवाड़ा पाए जाने पर कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी और संबंधित राशि की वसूली भी कराई जाएगी। अब देखना यह होगा कि शिकायतों के आधार पर जांच कब शुरू होती है और मौके पर निर्माण कार्यों के सत्यापन, भुगतान अभिलेखों तथा संबंधित वेंडर की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
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