कुसमी की बेटी आरती की कला पहुंची प्रधानमंत्री मोदी तक, आदिवासी लोककला को मिली राष्ट्रीय पहचान
सीधी जिले के कुसमी की आरती ने आदिवासी लोककला को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी कलाकृति की सराहना की। जानिए शिक्षा, सामाजिक सेवा और कला के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों की प्रेरक कहानी।
कुसमी की बेटी आरती की कला पहुंची प्रधानमंत्री मोदी तक, आदिवासी लोककला को मिली राष्ट्रीय पहचान
रवि शुक्ला,सीधी।
प्रतिभा जब मेहनत लगन और संस्कारों के साथ आगे बढ़ती है तो वह अपनी पहचान केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखती,बल्कि समाज और संस्कृति के लिए भी प्रेरणा बन जाती है, ऐसी ही विलक्षण प्रतिभा की धनी हैं कुसमी अंचल की बेटी आरती टांडिया, जिन्होंने शिक्षा, साहित्य, सामाजिक सेवा और आदिवासी लोककला के क्षेत्र में अपनी बहुआयामी प्रतिभा का परिचय दिया है। उनकी कला अब केवल स्थानीय अंचल तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश की सीमाएं लांघकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है। उनकी एक विशिष्ट कलाकृति देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट की गई, जिसकी उन्होंने सराहना की। यह उपलब्धि न केवल आरती के कला कौशल, बल्कि विंध्य की आदिवासी सांस्कृतिक विरासत के लिए भी गौरव का विषय बनी है।
आरती की कलाकृति को क्षेत्रीय विधायक कुंवर सिंह टेकाम के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचाया गया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी कलाकृति मंत्री राधा सिंह, सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, सिहावल विधायक विश्वामित्र पाठक और धौहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम द्वारा दिल्ली में भेंट की गई। प्रधानमंत्री ने कलाकृति की सराहना करते हुए इसे उनकी रचनात्मक क्षमता और क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। आरती ने बताया कि कला को विदेशों में भी सराहना की जा रही है यह हमारे और हमारे देश के लिए गर्व की बात है।
संस्कारों के सान्निध्य में निखरी प्रतिभा
आरती टांडिया के व्यक्तित्व की नींव शिक्षा और संस्कारों से समृद्ध पारिवारिक परिवेश में पड़ी। उनके पिता प्रेमलाल टांडिया और माता रामबाई टांडिया दोनों शिक्षक हैं। परिवार में ज्ञान, अनुशासन और सामाजिक सरोकारों का वातावरण रहा, जिसने आरती की प्रतिभा को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पांच भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर आने वाली आरती ने प्रारंभिक शिक्षा शंकरपुर भदौरा गांव के एक निजी विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद कक्षा 10वीं और 12वीं की पढ़ाई शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कुसमी से पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रीवा का रुख किया, जहां से बीए तथा राजनीति विज्ञान विषय में एमए की उपाधि अर्जित की।
महाविद्यालयीन जीवन में उनकी प्रतिभा केवल पुस्तकीय अध्ययन तक सीमित नहीं रही। निबंध लेखन, रंगोली, नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय सहभागिता रही। इसी बहुआयामी व्यक्तित्व और प्रतिभा के लिए उन्हें स्नातकोत्तर स्तर पर 'मिस पीजी' के खिताब से सम्मानित किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. सुशीला साह के हाथों प्राप्त यह सम्मान उनके विद्यार्थी जीवन की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल रहा।
सेवा की भावना से जुड़ा युवा रेडक्रॉस का सफर
आरती ने विद्यार्थी जीवन से ही समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझा और सेवा के मार्ग को अपनी जीवनयात्रा का हिस्सा बनाया। महाविद्यालय की युवा रेडक्रॉस सोसायटी से जुड़कर उन्होंने विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में सहभागिता की। इस दौरान प्राथमिक उपचार और आपातकालीन बचाव संबंधी प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।वर्ष 2013-14 में युवा रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पुरस्कृत एवं सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके भीतर मौजूद संवेदनशीलता, सामाजिक चेतना और जनसेवा के भाव का परिचायक बना।
स्वर्ण जयंती समारोह के मंच से बढ़ा आत्मविश्वास
वर्ष 2014 में शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रीवा के स्वर्ण जयंती समारोह में आरती को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला। इस गरिमामय आयोजन में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तत्कालीन खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल सहित प्रदेश के अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में सहभागिता ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई प्रदान की। स्नातकोत्तर शिक्षा के बाद उन्होंने रीवा से मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) की पढ़ाई पूरी की। इसके साथ ही अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा से बीएड की। शिक्षा और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए उन्होंने जन अभियान परिषद के मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम में मेंटर अर्थात परामर्शदाता के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंची आरती की कला
आरती टांडिया की पहचान का सबसे विशिष्ट पक्ष उनकी चित्रकला और आदिवासी लोककला के प्रति गहरा अनुराग है। उनके लिए लोककला महज रंगों और रेखाओं का संयोजन नहीं, बल्कि किसी समाज के इतिहास, परंपरा, जीवनशैली और सामूहिक स्मृतियों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। वे समय-समय पर विद्यालयीन बच्चों को पारंपरिक कला और क्राफ्ट का प्रशिक्षण देकर उनकी रचनात्मक क्षमता को निखारने का प्रयास करती रही हैं। एक विद्यालयीन कार्यक्रम के दौरान बच्चों की कला गतिविधियों में उनकी प्रतिभा क्षेत्रीय विधायक कुंवर सिंह टेकाम के संज्ञान में आई। उनकी कला से प्रभावित होकर विधायक ने उन्हें इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसके बाद आरती ने कपड़े पर आदिवासी लोककला से प्रेरित एक आकर्षक कलाकृति तैयार की और उसे विधायक को भेंट किया। इस कलाकृति में उकेरी गई सांस्कृतिक छवियों और पारंपरिक कलात्मक अभिव्यक्ति ने जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया। विधायक कुंवर सिंह टेकाम के माध्यम से यह कलाकृति मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेंट की गई।
इसके बाद उनकी कला को राष्ट्रीय पटल पर प्रतिष्ठा दिलाने का अवसर तब मिला, जब उनकी एक अन्य कलाकृति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिल्ली में भेंट की गई। मंत्री राधा सिंह, सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, सिहावल विधायक विश्वामित्र पाठक और धौहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम ने संयुक्त रूप से यह कलाकृति प्रधानमंत्री को भेंट की। प्रधानमंत्री द्वारा की गई सराहना ने आरती के कला-साधना के सफर को एक नई पहचान प्रदान की।
परिवार में शिक्षा के साथ साथ कला की प्रतिभा
आरती टांडिया की उपलब्धियों के पीछे एक ऐसा परिवार भी है, जहां शिक्षा और प्रतिभा की परंपरा पीढ़ियों से समृद्ध होती दिखाई देती है। उनकी बड़ी बहन अर्चना टांडिया जीव विज्ञान विषय की वर्ग-एक व्याख्याता हैं और सिंगरौली जिले के बरगवां क्षेत्र में सेवाएं दे रही हैं। उनकी छोटी बहन भी जीव विज्ञान विषय की वर्ग-एक व्याख्याता हैं।
एक अन्य बहन कल्पना टांडिया ने संगीत की शिक्षा प्राप्त की है और संगीत कला में विशेष रुचि रखती हैं। भाई मारुत नंदन ने दो विषयों में यूजीसी नेट उत्तीर्ण किया है तथा सहायक प्राध्यापक बनने की तैयारी कर रहे हैं। परिवार की सबसे छोटी बहन रवीना टांडिया ने कक्षा 12वीं की परीक्षा में प्रदेश की प्रावीण्य सूची में नौवां स्थान प्राप्त किया था। इस उपलब्धि पर उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। रवीना ने विधि की पढ़ाई पूरी करने के साथ लॉ विषय में भी नेट उत्तीर्ण किया है और आगे की तैयारी में जुटी हैं।
स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज से प्राप्त किया आशीर्वाद
आरती की कला यात्रा में आध्यात्मिक चेतना का भी विशेष स्थान है। उन्होंने अपनी एक विशिष्ट कलाकृति परम पूज्य श्री परमहंस परमानंद महाराज के शिष्य परम पूज्य श्री श्री 1008 स्वामी अड़गड़ानंद जी को भी भेंट की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
ग्रामीण प्रतिभा से राष्ट्रीय पहचान तक का प्रेरक सफर
आरती टांडिया की जीवनयात्रा इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा को यदि शिक्षा, अवसर और प्रोत्साहन का साथ मिले तो ग्रामीण अंचलों की बेटियां भी अपनी सृजनशीलता से व्यापक पहचान स्थापित कर सकती हैं। उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता के साथ सामाजिक सरोकारों और आदिवासी लोककला को भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। आज उनकी कलाकृतियां केवल कपड़े पर उकेरी गई आकृतियां नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक विरासत की झलक दिख रही हैं, जिसमें आदिवासी समाज का जीवन, प्रकृति से जुड़ाव और परंपराओं की जीवंत छवियां समाहित हैं। कुसमी की मिट्टी से निकलकर प्रधानमंत्री तक पहुंची उनकी कला की यह यात्रा क्षेत्र की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।
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