महखोर पंचायत में बिना निर्माण कार्य लाखों की राशि आहरण मामला : जांच के बाद सचिव पर सिर्फ वित्तीय कार्रवाई

मझौली की महखोर पंचायत में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 8.47 लाख रुपये आहरित किए जाने का मामला जांच के बाद भी सवालों में है। जांच टीम को मौके पर निर्माण कार्य नहीं मिला और पंचायत के आवश्यक रिकॉर्ड भी प्रस्तुत नहीं किए गए। सचिव का वित्तीय प्रभार हटाया गया, लेकिन आगे की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

Sep 28, 2026 - 21:46
Sep 28, 2026 - 22:09
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महखोर पंचायत में बिना निर्माण कार्य लाखों की राशि आहरण मामला : जांच के बाद सचिव पर सिर्फ वित्तीय कार्रवाई

महखोर पंचायत में बिना निर्माण कार्य लाखों की राशि आहरण मामला : जांच के बाद सचिव पर सिर्फ वित्तीय कार्रवाई

मझौली। मझौली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत महखोर में सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग का मामला जांच के बाद भी अंजाम तक पहुंचता नजर नहीं आ रहा है। मुख्यमंत्री अधोसंरचना मद से स्वीकृत सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए लाखों रुपये की राशि आहरित किए जाने के बावजूद जांच के दौरान मौके पर निर्माण कार्य नहीं मिलने और पंचायत के आवश्यक रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए जाने का मामला सामने आया था। मुख्य कार्यपालन अधिकारी मझौली द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और अपना प्रतिवेदन जनपद पंचायत मझौली में सौंप दिया। इसके बावजूद जिम्मेदारों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

8.47 लाख निकले, लेकिन निर्माण कहां है?

शिकायत में बताया गया कि ग्राम पंचायत महखोर में मुख्यमंत्री अधोसंरचना मद से सामुदायिक भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की गई थी। करीब 8.47 लाख रुपये की राशि आहरित की गई। शिकायतकर्ता ने तत्कालीन पंचायत सचिव ऋषिकेश गुप्ता पर आरोप लगाया कि निर्माण कार्य कराए बिना राशि का उपयोग किया गया।

मामला जनसुनवाई तक पहुंचा तो जिला पंचायत सीईओ सोम्या आनंद ने मझौली सीईओ से जांच टीम गठित करने का निर्देश दी,इसके बाद जांच टीम महखोर पहुंची। टीम के निरीक्षण के दौरान सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य मौके पर नहीं मिला। यहीं से मामला और गंभीर हो जाता है—जब निर्माण कार्य ही नहीं मिला तो लाखों रुपये की राशि किस आधार पर और किस काम के लिए आहरित की गई?

जांच टीम के सामने रिकॉर्ड भी नहीं आया

मामले में केवल निर्माण कार्य का सवाल ही नहीं है। जांच के दौरान पंचायत से संबंधित रिकॉर्ड भी जांच टीम के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आई है। टीम द्वारा रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने के बाद भी जनपद पंचायत स्तर पर रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया।जांच टीम ने इसके बाद अपना प्रतिवेदन तैयार कर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत मझौली को सौंप दिया। अब सवाल यह है कि जांच प्रतिवेदन में सामने आए तथ्यों के बाद जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची?

कार्रवाई के नाम पर सिर्फ वित्तीय प्रभार?

मामले में तत्कालीन सचिव ऋषिकेश गुप्ता का वित्तीय प्रभार हटाए जाने की कार्रवाई की गई। लेकिन शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोपों के बावजूद सरपंच की भूमिका को लेकर कोई कार्रवाई सामने नहीं आई है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि जांच के दौरान निर्माण कार्य नहीं मिला था, रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया था और राशि आहरण का मामला सामने आया था, तो केवल वित्तीय प्रभार हटाने तक कार्रवाई सीमित क्यों रही?

तबादलों के बीच सामने आया था मामला

जानकारी के अनुसार ऋषिकेश गुप्ता का कुछ समय के लिए धुआं डोल पंचायत से महखोर पंचायत में स्थानांतरण हुआ था। इसी अवधि में सामुदायिक भवन निर्माण से संबंधित राशि के आहरण का मामला सामने आया। बाद में वे पुनः धुआंडोल पंचायत में पदस्थ कर दिए गए और सुधाकर सिंह महखोर पंचायत में आ गए। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि ऋषिकेश गुप्ता पूर्व में महखोर पंचायत में पदस्थ रह चुके हैं और उस दौरान भी वित्तीय अनियमितता किए थे।

जांच के बाद निर्माण शुरू होने की चर्चा

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि जांच टीम के निरीक्षण के बाद कार्रवाई की आशंका को देखते हुए संबंधित पंचायत में निर्माण कार्य शुरू कराया गया। यदि ऐसा हुआ है तो एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि जांच के समय निर्माण कार्य मौजूद नहीं था, तो बाद में शुरू किया गया निर्माण किस प्रशासनिक आदेश और किस राशि से कराया गया?

क्या आहरित राशि से ही बाद में निर्माण कराया गया? यदि हां, तो पहले आहरित राशि के उपयोग का हिसाब क्या है? और यदि निर्माण किसी अन्य मद से कराया गया, तो उस मद की स्वीकृति और भुगतान का रिकॉर्ड क्या है?इन सवालों का जवाब जांच दस्तावेज, पंचायत के कैशबुक, भुगतान अभिलेख, मस्टर रोल, बिल-वाउचर और निर्माण संबंधी तकनीकी रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकता है।

अब जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई का इंतजार

पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी जांच टीम का प्रतिवेदन है। की जब जांच में वास्तव में निर्माण कार्य नहीं पाया गया और आवश्यक रिकॉर्ड भी प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसका जांच टीम द्वारा प्रतिवेदन भी प्रस्तुत कर दिया इसके बावजूद भी कोई ठोस कार्यवाही क्यों नहीं हुई।मामला जो कुछ भी पर सवाल जिम्मेदारों की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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Ravi Shukla रवि शुक्ला एक अनुभवी ग्राउंड रिपोर्टर हैं, दैनिक अखबारों और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है.रवि शुक्ला की मुख्य विशेषज्ञता हाइपर लोकल क्राइम, क्षेत्रीय राजनीति, प्रशासनिक,शिक्षा, फैसलों और ग्रामीण विषयों (खेती-किसानी) की ग्राउंड जीरो से तथ्यपरक रिपोर्टिंग करने में अच्छा अनुभव है।