PS Mavis Tak Success Story: बेटियों को पढ़ाकर क्या कलेक्टर-SP बनाओगे? IPS बनी बेटी, पिता के भरोसे ने रच दी सफलता की कहानी

Sep 29, 2026 - 14:34
Sep 29, 2026 - 14:35
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PS Mavis Tak Success Story: बेटियों को पढ़ाकर क्या कलेक्टर-SP बनाओगे? IPS बनी बेटी, पिता के भरोसे ने रच दी सफलता की कहानी

PS Mavis Tak Success Story: बेटियों को पढ़ाकर क्या कलेक्टर-SP बनाओगे? IPS बनी बेटी, पिता के भरोसे ने रच दी सफलता की कहानी

आज के समय में भी कई परिवारों को बेटियों की शिक्षा को लेकर समाज के ताने सुनने पड़ते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है IPS अधिकारी मेविश टाक की, जिन्होंने समाज की सोच को गलत साबित करते हुए सफलता की नई मिसाल कायम की है। राजस्थान के पाली जिले से ताल्लुक रखने वाली मेविश टाक के पिता अब्दुल करीम टाक को अक्सर यह ताने सुनने पड़ते थे कि “बेटियों को इतना पढ़ाकर क्या कलेक्टर या SP बनाओगे?” लेकिन उन्होंने कभी इन बातों को महत्व नहीं दिया और अपनी बेटियों की पढ़ाई जारी रखी।

मेविश टाक का परिवार मूल रूप से राजस्थान का है, लेकिन उनका पालन-पोषण मुंबई में हुआ। उनके पिता बॉम्बे हाईकोर्ट में ट्रांसलेटर के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार में मेविश के अलावा उनकी दो बहनें भी हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के न्यू कैंब्रिज स्कूल से पूरी की और 12वीं रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स से की। इसके बाद उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और आगे की पढ़ाई भी पूरी की।मेविश ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की, लेकिन शुरुआती दो प्रयासों में वे प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं कर पाईं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में रणनीति बदलकर सेल्फ स्टडी पर फोकस किया।उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने UPSC में 386वीं रैंक हासिल की, जिसके बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में हुआ। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश कैडर की 2022 बैच की IPS अधिकारी हैं।

IPS बनने के बाद उन्होंने बांदा जिले में सेवाएं दीं, जहां उन्होंने साइबर, क्राइम और कानून-व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य संभाले। इसके बाद सितंबर 2026 में उनका तबादला सोनभद्र किया गया, जहां उन्हें एडिशनल एसपी (ASP) की जिम्मेदारी सौंपी गई।

सोनभद्र जैसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती माना जाता है, लेकिन मेविश टाक ने इसे स्वीकार करते हुए अपनी जिम्मेदारी संभाली। खास बात यह रही कि 24 सितंबर को अपने जन्मदिन के दिन ही उन्होंने सोनभद्र में पदभार ग्रहण किया।

मेविश टाक का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास ही असली कुंजी है। उनकी कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो समाज के तानों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत रखते हैं।

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