Gwalior Sheetla Mata Temple Accident: शीतला माता मंदिर के पास भीषण हादसा: ट्रक ने श्रद्धालुओं को रौंदा, 12 की मौत, 70 से ज्यादा घायल
Gwalior Sheetla Mata Temple Accident: ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास श्रद्धालुओं को ट्रक ने रौंदा। हादसे में 12 लोगों की मौत, 70 से ज्यादा घायल। CM मोहन यादव ने जताया दुख, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के निर्देश।
Gwalior Sheetla Mata Temple Accident: शीतला माता मंदिर के पास भीषण हादसा: ट्रक ने श्रद्धालुओं को रौंदा, 12 की मौत, 70 से ज्यादा घायल
सप्तमी पर दर्शन के लिए उमड़ी थी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़, पांच दुकानों को तोड़ते हुए घुसा ट्रक; मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जताया दुख, लापरवाही पर पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास शनिवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। सप्तमी पर दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं की भीड़ में चीनोर की ओर से ढलान पर तेज रफ्तार से आ रहा धान से भरा ट्रक अनियंत्रित होकर घुस गया। ट्रक सड़क किनारे प्रसाद की दुकानों पर खड़े लोगों और दर्शनार्थियों को रौंदता हुआ पांच दुकानों को तोड़कर मंदिर के प्रवेश द्वार से जा टकराया। इस भीषण हादसे में 12 लोगों की मौत की पुष्टि की गई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों में महिलाएं भी शामिल हैं। हादसे में कई लोगों के हाथ-पैर कटने और ट्रक के नीचे दबने की भी जानकारी सामने आई।
हादसा शनिवार रात करीब 1:30 बजे हुआ। घटना के बाद मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और ट्रक के नीचे फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। रात करीब 3 बजे कलेक्टर रुचिका चौहान भी अस्पताल पहुंचीं। देर रात तक राहत एवं बचाव कार्य जारी रहा। अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई थी।
सप्तमी पर हजारों श्रद्धालु पहुंचे, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
शीतला माता मंदिर में सप्तमी के अवसर पर ग्वालियर के अलावा भिंड, मुरैना, दतिया सहित आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। ऐसे में मंदिर मार्ग पर भारी भीड़ मौजूद थी। इसके बावजूद व्यस्त मार्ग पर ट्रक के प्रवेश को रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। दैनिक भास्कर में छपी खबर के अनुसार, ट्रक ढलान से तेज गति में आया और लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हादसे में पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की शुरुआती प्रतिक्रिया तथा राहत कार्य में समन्वय को लेकर भी सवाल उठे। लोगों का कहना था कि शुरुआत में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक ही घायलों को निकालने में जुटे रहे।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया आंखों देखा मंजर
हादसे के दौरान दैनिक भास्कर के सीएसडी हेड अमित शर्मा और उनके भाई अभय शर्मा भी घायल हो गए। घायल होने के बावजूद दोनों ने ट्रक और मलबे के नीचे फंसे चार लोगों को बाहर निकालने में मदद की। अमित शर्मा के मुताबिक, ट्रक इतनी तेज रफ्तार से आया कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला। वह पांच दुकानों को तोड़ता हुआ मंदिर के गेट से टकरा गया। घटनास्थल पर चारों ओर घायल लोग पड़े थे और मदद के लिए चीख-पुकार मची हुई थी। उन्होंने बताया कि अपनी आंखों के सामने कई लोगों की जान जाते देखी। वहीं, दर्शनार्थी संदीप सिंह ने बताया कि वह मंदिर के सामने प्रसाद की दुकान के पास खड़े थे। रात करीब डेढ़ बजे अचानक तेज आवाज सुनाई दी। बाहर देखा तो ट्रक अनियंत्रित होकर दुकानों और श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में ले चुका था। घटनास्थल पर बच्चों और महिलाओं की चीख-पुकार से माहौल बेहद भयावह हो गया था।
तीन घंटे तक ट्रक नहीं हटने की बात
हादसे के बाद ट्रक के नीचे लोगों के दबे होने की सूचना से अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रक को हटाने के लिए क्रेन की व्यवस्था में देरी हुई और काफी समय तक लोग उसके नीचे फंसे रहे। बताया गया कि ट्रक धान से भरा हुआ था और मंदिर मार्ग की तीव्र ढलान पर अनियंत्रित हो गया। हालांकि, हादसे के कारणों और राहत कार्य में कथित लापरवाही की वास्तविक स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जताया दुख
ग्वालियर हादसे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत हृदयविदारक है। दुख की इस घड़ी में राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।
पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री ने घटना में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सीएसपी को तत्काल हटाने तथा तीन थाना प्रभारियों, एक यातायात निरीक्षक, एक प्रधान आरक्षक और तीन आरक्षकों को निलंबित करने के निर्देश दिए। साथ ही घटना की विस्तृत जांच कराने को कहा, ताकि जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और जनसुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए।
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