संजय टाइगर रिजर्व में हरे पेड़ों की कटाई का आरोप, दुवरी रेंज के चिंगवाह बीट का मामला,वीडियो वायरल
सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व के दुवरी रेंज में हरे पेड़ों की कटाई के आरोप लगे हैं। चिंगवाह बीट में ग्रामीणों ने वीडियो बनाकर जांच की मांग की है। वन विभाग पर गंभीर सवाल उठे।
संजय टाइगर रिजर्व में हरे पेड़ों की कटाई का आरोप, दुवरी रेंज के चिंगवाह बीट का मामला,वीडियो वायरल
रवि शुक्ला,सीधी।
मध्य प्रदेश के संजय टाइगर रिजर्व से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जंगल की सुरक्षा के जिम्मेदार विभाग पर ही हरे-भरे और कीमती पेड़ों की कटाई करवाने के आरोप लगे हैं। यह मामला दुवरी रेंज के चिंगवाह बीट क्षेत्र का बताया जा रहा है, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीण ने बनाया वीडियो:
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में बड़े-बड़े और मोटे पेड़ों को जड़ से काटा जा रहा है। एक ग्रामीण ने इसका वीडियो बनाकर सामने लाया है, जिसमें कथित तौर पर कटे हुए पेड़ और उनसे बनाई जा रही बाड़ी (घेराबंदी) दिखाई दे रही है। ग्रामीण का दावा है कि सरई, तेंदु समेत कई हरे-भरे पेड़ों को काटा गया है, जो नियमों के खिलाफ है।
“बाड़ी ही खेत खाने लगे…” कहावत हुई चरितार्थ
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि “बाड़ी ही खेत खाने लगे तो उसका क्या फायदा।” उनका आरोप है कि जिस विभाग पर जंगल बचाने की जिम्मेदारी है, वही यदि पेड़ों की कटाई कराए, तो यह बेहद चिंताजनक है।
3 किलोमीटर क्षेत्र में कटाई का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 3 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में हरे पेड़ों की कटाई की गई है. उनका आरोप है कि यह कार्य स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की मिलीभगत से किया जा रहा है, जिससे लाखों रुपये के कीमती पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
वन विभाग के कर्मचारियों पर आरोप
ग्रामीण ने जंगल विभाग के मुंशी, रेंजर सहित सीसीएफ सहित अन्य अधिकारियों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बाड़ी बनाने के लिए जाली या तार का उपयोग किया जा सकता था, या फिर केवल सूखे और कटाई योग्य पेड़ों का इस्तेमाल होना चाहिए था। लेकिन यह तो उल्टा हो रहा है यहां हरे भरे पेड़ों को काटा जा रहा है।वहीं उन्होंने आगे बताया कि संजय टाइगर रिजर्व में जंगल काटना नहीं बल्कि लगाया जाना चाहिए,पर यहां ऐसा नहीं है यहां तो हजारों पेड़ों को काटकर बेचने के फिराक में हैं इसलिए इतने मोटे पेड़ों को काटा जा रहा है।
जांच की मांग, मामला गंभीर
हालांकि, इस पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन आरोप गंभीर हैं और इसकी निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न सिर्फ वन संरक्षण नियमों का उल्लंघन होगा, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
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