PNG Gas News: पेट्रोल के बाद अब PNG गैस में मिलावट की तैयारी, जानें आपकी रसोई पर क्या होगा असर

PNG Gas News: PNGRB ने घरेलू पाइप्ड गैस में 5% तक हाइड्रोजन मिलाने का ड्राफ्ट जारी किया। जानें गैस की कीमत, सुरक्षा और आम उपभोक्ताओं पर इसका क्या असर होगा।

Oct 14, 2026 - 23:24
Oct 14, 2026 - 23:24
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PNG Gas News:  पेट्रोल के बाद अब PNG गैस में मिलावट की तैयारी, जानें आपकी रसोई पर क्या होगा असर

PNG Gas News: पेट्रोल के बाद अब PNG गैस में मिलावट की तैयारी, जानें आपकी रसोई पर क्या होगा असर

नई दिल्ली। देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक नई पहल प्रस्तावित है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने घरों में पाइप के जरिए पहुंचने वाली पीएनजी (PNG) गैस में अधिकतम 5 प्रतिशत तक हाइड्रोजन मिलाने को लेकर ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की हैं। इस प्रस्ताव के तहत चुनिंदा घरेलू गैस वितरण नेटवर्क में हाइड्रोजन और प्राकृतिक गैस के मिश्रण का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि फिलहाल यह प्रस्ताव है। इसे लागू करने से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं, तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा संबंधी जांच और नियामक की मंजूरी पूरी करनी होगी। ऐसे में अभी घरेलू उपभोक्ताओं की गैस सप्लाई में तत्काल किसी बदलाव की घोषणा नहीं हुई है।

 PNG गैस में हाइड्रोजन मिलाने की तैयारी क्यों?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के विकल्प बढ़ाने के लिए हाइड्रोजन को संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्राकृतिक गैस में सीमित मात्रा में हाइड्रोजन मिलाकर उसका इस्तेमाल घरेलू पीएनजी नेटवर्क में किया जा सकेगा। इससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और भविष्य में गैस आपूर्ति के नए विकल्प विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, ड्राफ्ट में घरेलू पीएनजी नेटवर्क के चुनिंदा हिस्सों में अधिकतम 5 प्रतिशत हाइड्रोजन मिश्रण की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके लिए संबंधित गैस वितरण कंपनियों को पहले PNGRB से मंजूरी लेनी होगी।

 क्या आपकी रसोई में इस्तेमाल होने वाली गैस महंगी होगी?

इस प्रस्ताव को लेकर उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल गैस के बिल को लेकर है। हाइड्रोजन, खासकर ग्रीन हाइड्रोजन, की उत्पादन लागत फिलहाल प्राकृतिक गैस की तुलना में अधिक है। ऐसे में इसके मिश्रण से गैस वितरण कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सरकारी समर्थन वाली निविदाओं में ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत जीएसटी सहित लगभग 387 से 397 रुपये प्रति किलोग्राम रही है। वहीं, अक्टूबर 2026 के लिए घरेलू प्राकृतिक गैस का बेंचमार्क मूल्य 11.22 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू बताया गया है। ऊर्जा के बराबर आधार पर ग्रीन हाइड्रोजन की अनुमानित लागत प्राकृतिक गैस की तुलना में काफी अधिक बैठती है। हालांकि, इन दोनों की कीमतों की सीधी तुलना करते समय उत्पादन, परिवहन, मिश्रण और वितरण से जुड़ी लागतों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। दिल्ली में घरेलू पीएनजी की बताई गई कीमत 50.59 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) है। लेकिन हाइड्रोजन मिश्रण से उपभोक्ताओं के बिल में कितनी बढ़ोतरी होगी या कीमतों में कोई बदलाव होगा भी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अंतिम असर हाइड्रोजन की वास्तविक लागत, मिश्रण की मात्रा, वितरण कंपनियों की नीति और नियामकीय फैसलों पर निर्भर करेगा।

 सुरक्षा के लिए कंपनियों को करने होंगे जरूरी बदलाव

हाइड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील गैस है। इसलिए इसे मौजूदा प्राकृतिक गैस नेटवर्क में मिलाने से पहले पाइपलाइन, वाल्व, दबाव नियंत्रण प्रणाली, मीटर और अन्य उपकरणों की उपयुक्तता की जांच करना जरूरी होगा।

हाइड्रोजन के गुण प्राकृतिक गैस से अलग होते हैं। ऐसे में नेटवर्क के कुछ हिस्सों में सामग्री की अनुकूलता, गैस रिसाव की निगरानी और संचालन संबंधी जोखिमों का आकलन करना पड़ सकता है। प्रस्तावित दिशानिर्देशों के तहत गैस वितरण कंपनियों को सुरक्षा रिपोर्ट, पाइपलाइन नेटवर्क का आकलन और उपकरणों की अनुकूलता से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से सुरक्षा और संचालन की समीक्षा कराने के साथ जरूरी वैधानिक अनुमतियां भी प्राप्त करनी होंगी। इन सभी प्रक्रियाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हाइड्रोजन मिश्रित गैस का इस्तेमाल निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही किया जाए।

 कब शुरू हो सकती है हाइड्रोजन मिली PNG की सप्लाई?

घरेलू पीएनजी में हाइड्रोजन मिलाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू नहीं होगी। इसके लिए पहले जरूरी नीतिगत और कानूनी ढांचा तैयार करना होगा। इसके बाद संबंधित कंपनियों को नियामक की विशिष्ट मंजूरी प्राप्त करनी होगी। ड्राफ्ट के अनुसार, जरूरी नियामकीय ढांचा और कानूनी प्रावधान अंतिम होने के बाद शुरुआती सीमित इस्तेमाल तक पहुंचने में लगभग दो से तीन साल लगने का अनुमान है। प्रस्ताव पर संबंधित पक्षों से 11 नवंबर तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी गई हैं। मंजूरी मिलने के बाद भी कंपनियों को सीमित नेटवर्क में परीक्षण करना होगा। इस दौरान गैस की गुणवत्ता, उपकरणों की अनुकूलता, सुरक्षा और संचालन संबंधी मानकों का मूल्यांकन किया जाएगा। परीक्षण के परिणामों के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।

 किन उपभोक्ताओं पर लागू नहीं होगा यह प्रस्ताव?

प्रस्तावित दिशानिर्देश मुख्य रूप से घरेलू पीएनजी आपूर्ति पर केंद्रित हैं। इसके दायरे में फिलहाल निम्नलिखित श्रेणियां शामिल नहीं हैं:

- वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG: वाहनों के लिए सीएनजी में हाइड्रोजन मिलाने की व्यवस्था इस प्रस्ताव का हिस्सा नहीं है।

- मुख्य गैस ट्रांसमिशन पाइपलाइन: प्राकृतिक गैस की प्रमुख ट्रांसमिशन पाइपलाइनों पर यह प्रस्ताव स्वतः लागू नहीं होगा।

- व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ता: होटल, कारखानों और अन्य व्यावसायिक इकाइयों को दी जाने वाली गैस इस ड्राफ्ट के दायरे में नहीं है, जब तक उनके लिए अलग से मंजूरी या व्यवस्था न हो।

स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में कदम

घरेलू पीएनजी में हाइड्रोजन मिलाने का प्रस्ताव भारत के स्वच्छ ऊर्जा प्रयासों का हिस्सा है। इससे भविष्य में प्राकृतिक गैस के साथ हाइड्रोजन के इस्तेमाल की संभावनाओं का आकलन किया जा सकता है। हालांकि, इस पहल की सफलता तकनीकी सुरक्षा, उपलब्धता, लागत और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव पर निर्भर करेगी।

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