Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा को क्यों पसंद है मोदक? जानें ‘मोदकप्रिय’ गणेश जी से जुड़ी पौराणिक कथा और महत्व

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी को ‘मोदकप्रिय’ कहा जाता है। लेकिन इसके पीछे सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि एक गहरी पौराणिक कथा और आध्यात्मिक संदेश भी छिपा है। आइए जानते हैं आखिर क्यों बप्पा को मोदक इतना प्रिय है।

Sep 11, 2026 - 11:37
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Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा को क्यों पसंद है मोदक? जानें ‘मोदकप्रिय’ गणेश जी से जुड़ी पौराणिक कथा और महत्व
Ganesh Ji Modak Bhog : गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को मोदक का भोग( Photo source:NBT)

Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा को क्यों पसंद है मोदक? जानें ‘मोदकप्रिय’ गणेश जी से जुड़ी पौराणिक कथा और महत्व

Ganesh Chaturthi 2026 Special: गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर घरों और पंडालों में भगवान गणेश के लिए खास भोग तैयार किए जाते हैं। इनमें मोदक का विशेष महत्व होता है। पारंपरिक उकड़ीचे मोदक से लेकर ड्राई फ्रूट और चॉकलेट मोदक तक, यह मिठाई गणपति उत्सव का अहम हिस्सा बन चुकी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश को ‘मोदकप्रिय’ कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे एक दिलचस्प पौराणिक कथा भी जुड़ी है?

 क्यों कहा जाता है गणेश जी को ‘मोदकप्रिय’?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवताओं ने माता पार्वती को एक दिव्य मोदक भेंट किया। यह मोदक विशेष ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक माना गया। जब यह मोदक भगवान गणेश और उनके भाई कार्तिकेय के बीच आया, तो माता पार्वती और भगवान शिव ने एक शर्त रखी। उन्होंने कहा कि जो भी पहले पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर वापस आएगा, वही इस दिव्य मोदक का अधिकारी होगा।

 कार्तिकेय निकले दुनिया की यात्रा पर, गणेश जी ने अपनाई बुद्धिमानी

कथा के अनुसार, भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर दुनिया का भ्रमण करने निकल पड़े। वहीं भगवान गणेश ने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया। उन्होंने माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा की और कहा— “मेरे लिए माता-पिता ही पूरी दुनिया हैं।” गणेश जी की इस बुद्धिमत्ता और भक्ति से प्रसन्न होकर शिव-पार्वती ने उन्हें वह दिव्य मोदक दे दिया।

 मोदक का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

इसी कथा के कारण भगवान गणेश को ‘मोदकप्रिय’ कहा जाने लगा। गणेश चतुर्थी पर मोदक चढ़ाने की परंपरा इसी मान्यता से जुड़ी है। धार्मिक व्याख्याओं में मोदक का खास अर्थ भी बताया गया है— इसका बाहरी आवरण जीवन की कठिनाइयों का प्रतीक है,अंदर की मीठी भरावन ज्ञान, खुशी और संतोष को दर्शाती है, यानी जीवन में कठिनाइयों के बावजूद भीतर ज्ञान और आनंद का मार्ग छिपा होता है।

 गणेश चतुर्थी पर कौन सा मोदक बनाएं?

गणेश उत्सव में सबसे ज्यादा लोकप्रिय उकड़ीचे मोदक होते हैं, जिन्हें चावल के आटे और नारियल-गुड़ की भरावन से बनाया जाता है।इसके अलावा आजकल कई नए फ्लेवर भी ट्रेंड में हैं— ड्राई फ्रूट मोदक,मावा मोदक,चॉकलेट मोदक, घर पर मोदक बनाकर भगवान गणेश को भोग लगाना और फिर प्रसाद के रूप में बांटना इस पर्व की सुंदर परंपरा मानी जाती है।

 

 Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इस कथा के विभिन्न रूप मिलते हैं। इसे ऐतिहासिक या वैज्ञानिक तथ्य के रूप में न लें।

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