Sidhi News: सीधी में अनोखा विरोध: सवर्ण नेताओं की निकली प्रतीकात्मक अर्थी, मुंडन कर किया पिंडदान
सीधी में सवर्ण समाज का अनोखा विरोध, नेताओं की प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर मुंडन और पिंडदान किया। आरक्षण और SC-ST एक्ट को लेकर जताई नाराजगी।
Sidhi News: सीधी में अनोखा विरोध: सवर्ण नेताओं की निकली प्रतीकात्मक अर्थी, मुंडन कर किया पिंडदान
सीधी, मध्यप्रदेश।
जातिगत आरक्षण, एससी-एसटी एक्ट और यूजीसी कानून के विरोध को लेकर सीधी जिले में रविवार को एक अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला। सीधी-रीवा मुख्य मार्ग स्थित सोन नदी के कोलदहा घाट पर सवर्ण समाज के लोगों ने अपने ही समाज के नेताओं के खिलाफ सांकेतिक विरोध दर्ज करते हुए प्रतीकात्मक अर्थी निकाली। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने मुंडन संस्कार कराया और विधि-विधान से पिंडदान कर अंत्येष्टि की रस्म पूरी की।
नेताओं की चुप्पी पर उठाए सवाल
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे शत्रुघ्न पांडे ने कहा कि यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों पर नेताओं की कथित चुप्पी के खिलाफ है। उनका कहना था कि अन्य वर्गों के नेता अपने समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, लेकिन सवर्ण समाज के मुद्दों को लेकर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिख रही है।
मुंडन और पिंडदान कर जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान पहले मुंडन कराया गया, जिसके बाद सवर्ण नेताओं की प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर कोलदहा घाट पहुंचाया गया.यहां पिंडदान और अंत्येष्टि संस्कार की रस्म निभाई गई. इस दौरान शत्रुघ्न पांडे और हरी मिश्रा ने भी मुंडन कर विरोध दर्ज कराया.
कई लोग रहे मौजूद
इस विरोध प्रदर्शन में नीरज मिश्रा, दिलराज सिंह, शिवा पाठक, शिवपूजन पांडे सहित सवर्ण समाज के कई लोग शामिल रहे. प्रदर्शन का यह अनोखा तरीका पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना रहा.
बड़े आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों पर नेताओं ने आवाज नहीं उठाई, तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा. उन्होंने संकेत दिए कि जिला ही नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर पर भी आंदोलन की रणनीति बनाई जा सकती है.
चुनावी असर के संकेत
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि समाज के मुद्दों की अनदेखी का असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है. उनका मानना है कि यदि राजनीतिक दलों ने इन विषयों पर ध्यान नहीं दिया, तो इसका सीधा प्रभाव चुनावी परिणामों पर पड़ेगा.सीधी में किया गया यह प्रतीकात्मक पिंडदान और अर्थी निकालने का प्रदर्शन न केवल अनोखा रहा, बल्कि इसने स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर नई बहस भी छेड़ दी है।
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