Sidhi News: गोपद नदी की रेत खदान का विरोध जारी, कलेक्टर को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग ; 15 दिन का अल्टीमेटम
Sidhi News: गोपद नदी की रेत खदान का विरोध जारी, कलेक्टर को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग ; 15 दिन का अल्टीमेटम
गोतरा घाट पर रेत खदान के संचालन की तैयारी पर उठाए सवाल, पर्यावरणीय स्वीकृति से लेकर खनन की गहराई तक जांच की मांग; 15 दिन में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
सीधी/कुसमी।
मध्यप्रदेश के सीधी जिले की कुसमी तहसील अंतर्गत ग्राम गोतरा में गोपद नदी के घाट पर प्रस्तावित रेत खदान को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। ग्रामवासियों और ग्राम पंचायत गोतरा के पेसा अध्यक्ष ने जिला प्रशासन से खदान की सीमा का सीमांकन कराने, आवश्यक दस्तावेजों की जांच करने तथा ग्रामसभा की सहमति के बिना खनन शुरू नहीं होने देने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान संचालन की तैयारी के तहत मशीनें लाने और रास्ता बनाने की प्रक्रिया की जा रही है, जबकि उनके अनुसार अब तक मौके पर खदान की सीमा का विधिवत सीमांकन नहीं हुआ है।
इस संबंध में 27 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर सीधी और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), कुसमी के नाम आवेदन दिए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कर खदान संचालन से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कराने की मांग की है।
खदान की सीमा निर्धारित नहीं होने पर उठाए सवाल
ग्रामीणों ने अपने आवेदन में कहा है कि गोपद नदी के गोतरा घाट पर प्रस्तावित रेत खदान की सीमा, खसरा नंबर और स्वीकृत रकबे की मौके पर स्पष्ट पहचान नहीं की गई है। उनका कहना है कि राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सीमांकन कराकर खदान की वास्तविक सीमा निर्धारित की जानी चाहिए। साथ ही सीमा की पहचान के लिए पक्के पिलर और आवश्यक संकेतक लगाए जाने चाहिए, ताकि स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खनन की आशंका न रहे।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सीमांकन की प्रक्रिया ग्रामसभा के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कराई जाए और जब तक सीमा स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक खनन संचालन की अनुमति नहीं दी जाए।
गहरी नदी में खनन से खेतों और जलस्तर पर खतरे की आशंका
ग्रामीणों ने गोपद नदी को गहरा बताते हुए आशंका जताई है कि अनियंत्रित या निर्धारित सीमा से अधिक गहराई तक रेत खनन होने से नदी के किनारों का कटाव बढ़ सकता है। इससे आसपास के खेतों की मेड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने नदी में गहरे गड्ढे बनने से बच्चों और मवेशियों की सुरक्षा पर खतरा पैदा होने की बात भी कही है।
आवेदन में यह भी आशंका जताई गई है कि नदी के तल में अत्यधिक खुदाई से आसपास के कुओं और हैंडपंपों के जलस्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीणों ने नदी के प्राकृतिक स्वरूप, खेतों, निस्तार घाट और श्मशान घाट की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने पेसा अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा है कि खनन संबंधी प्रक्रिया में ग्रामसभा की भूमिका और लागू कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि गोतरा घाट पर रेत खदान के संचालन को लेकर ग्रामसभा की सहमति प्राप्त करने की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है। उन्होंने प्रशासन से ग्राम गोतरा में विशेष ग्रामसभा आयोजित कराने की मांग की है, ताकि ग्रामीणों की आपत्तियां दर्ज की जा सकें और खदान से संबंधित दस्तावेज ग्रामसभा के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकें।
पर्यावरणीय स्वीकृति और जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट की जांच की मांग
पेसा अध्यक्ष की ओर से एसडीएम कुसमी और सीधी कलेक्टर को दिए गए आवेदन में खदान से जुड़े छह प्रमुख बिंदुओं पर जांच कराने की मांग की गई है। इनमें पर्यावरणीय स्वीकृति (EC), जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (DSR), स्वीकृत खनन योजना, खदान की सीमा एवं गहराई, नदी की प्राकृतिक संरचना, परिवहन रिकॉर्ड तथा प्रदूषण नियंत्रण संबंधी अनुमतियां शामिल हैं।
आवेदन में प्रशासन से यह पता लगाने की मांग की गई है कि गोतरा घाट सीधी जिले की अनुमोदित जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में रेत खनन के लिए शामिल है या नहीं। साथ ही ठेकेदार के पास संबंधित प्राधिकरण से जारी वैध पर्यावरणीय स्वीकृति है या नहीं, इसकी भी जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने स्वीकृत खनन योजना की प्रति उपलब्ध कराने, खदान की निर्धारित सीमा और गहराई का सत्यापन करने तथा नदी के बहाव और प्राकृतिक संरचना में किसी तरह के बदलाव की जांच करने की मांग की है।
मशीनों से खनन और परिवहन रिकॉर्ड की जांच की मांग
ग्रामीणों ने आवेदन में जेसीबी और पोकलेन जैसी मशीनों के इस्तेमाल की आशंका जताते हुए इसकी वैधानिकता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नदी में खनन के दौरान लागू पर्यावरणीय शर्तों और खनन संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन होना चाहिए। इसके अलावा रेत परिवहन के लिए जारी ई-ट्रांजिट पास (रवन्ना), प्रतिदिन निकाली जाने वाली रेत की मात्रा, ओवरलोड वाहनों और खनिज बैरियर पर दर्ज रिकॉर्ड का मिलान कराने की मांग भी की गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लागू सहमति और धूल नियंत्रण के उपायों की जांच कराने का आग्रह किया गया है।
संयुक्त जांच दल गठित करने की मांग
पेसा अध्यक्ष ने राजस्व, खनिज, पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित विभागों के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर जांच कराने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि जांच के दौरान पर्यावरणीय स्वीकृति, जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट, खनन योजना, प्रदूषण नियंत्रण संबंधी सहमति और परिवहन रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाए। उन्होंने जांच पूरी होने तक गोपद नदी के गोतरा घाट पर खनन गतिविधियों को रोकने तथा विशेष ग्रामसभा सह पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित कराने का भी अनुरोध किया है।
15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
कलेक्टर को दिए गए आवेदन में ग्रामीणों ने 15 दिनों के भीतर जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि खदान की सीमा का निर्धारण किए बिना और लागू कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किए बिना खनन शुरू करने का प्रयास नहीं रोका गया, तो ग्रामवासी अपनी नदी और गांव के हितों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने को बाध्य होंगे। फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण कराने, खदान से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन करने और नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। प्रशासन की ओर से इस मामले में जांच या कार्रवाई की स्थिति की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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