MP News: मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा एक्शन: 7 अधिकारी बर्खास्त, 135 CMO समेत 392 अधिकारियों पर भी गिरी गाज

मध्य प्रदेश सरकार बड़ी कार्यवाही की है के 374 नगरीय निकायों में वर्ष 2023 से 2026 के बीच 1,134 करोड़ रुपये की खरीदी की जांच में सामने आईं अनियमितताएं पर सात अधिकारी सेवा से बर्खास्त, 76 की वेतन वृद्धि रोकी गई और 80 फर्में ब्लैकलिस्ट।

Oct 25, 2026 - 15:17
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MP News: मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा एक्शन: 7 अधिकारी बर्खास्त, 135 CMO समेत 392 अधिकारियों पर भी गिरी गाज 

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी खरीदी में कथित वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से नगरीय निकायों में की गई खरीदी की जांच के बाद करीब 392 अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। इनमें लगभग 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) भी शामिल हैं। नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के अनुसार, अब तक सात अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, जबकि करीब 3 से 4 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। इसके अलावा 80 से अधिक ठेकेदारों और सप्लायर्स के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई है।

सरकार की इस कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाना और जनता के पैसे का उचित उपयोग सुनिश्चित करना है।

 1,134 करोड़ की खरीदी में 250 करोड़ की संभावित बचत का मामला

मीडिया रिपोर्ट की माने तो विभागीय समीक्षा और विशेष ऑडिट के दौरान वर्ष 2023 से 2026 के बीच प्रदेश के 374 नगरीय निकायों में GeM पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदी के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस अवधि में करीब 1,134 करोड़ रुपये की खरीदी हुई। जांच में लगभग 250 करोड़ रुपये की संभावित बचत से संबंधित गंभीर विसंगतियां सामने आने की बात कही गई है।

आरोप है कि कई मामलों में समान प्रकृति की वस्तुओं को अलग-अलग निकायों ने काफी भिन्न दरों पर खरीदा। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर जरूरत से अधिक सामान खरीदने और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने के मामले भी सामने आए।

दो लाख का कचरा वाहन छह लाख रुपये में खरीदने का मामला

जांच के दौरान कचरा वाहनों की खरीदी में कीमतों के बड़े अंतर का उदाहरण सामने आया। बताया गया कि एक नगरीय निकाय ने जिस वाहन को करीब दो लाख रुपये में खरीदा, उसी तरह का वाहन दूसरे निकाय में अतिरिक्त उपकरणों के नाम पर लगभग छह लाख रुपये में खरीदा गया।

इसके अलावा, कुछ छोटे नगरीय निकायों में जरूरत के आकलन के बिना ही डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपये तक के कचरा वाहन खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे मामलों में खरीदी की आवश्यकता, वाहनों की तकनीकी विशेषताओं और वास्तविक लागत की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 एलईडी लाइट और केमिकल की कीमतों में भारी अंतर

सरकारी खरीदी में एलईडी लाइट की दरों को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 306 रुपये की बताई गई एलईडी लाइट कुछ निकायों में 11,800 रुपये तक की दर पर खरीदे जाने का मामला सामने आया। वहीं, 200 एलईडी लाइट की खरीदी पर 60 लाख रुपये तक खर्च किए जाने का उल्लेख है।

इसी तरह, एक केमिकल की कीमत करीब पांच रुपये प्रति लीटर बताई गई, जबकि कुछ स्थानों पर इसे 33,500 रुपये प्रति लीटर तक की दर पर खरीदा हुआ दर्शाने का मामला सामने आया। इन आंकड़ों के आधार पर खरीदी प्रक्रिया और दरों के निर्धारण पर सवाल उठे हैं। हालांकि, वास्तविक वित्तीय नुकसान और जिम्मेदारी का निर्धारण आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जाएगा।

 सात अधिकारी बर्खास्त, करोड़ों की वसूली

नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के अनुसार, वित्तीय अनियमितताओं और पदीय लापरवाही के मामलों में लगभग 392 अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। इनमें करीब 135 सीएमओ भी शामिल हैं।

अब तक सात अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किए जाने और लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये की वसूली की जानकारी दी गई है। इसके अलावा 80 से अधिक ठेकेदारों और सप्लायर्स के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। विभागीय विवरण में 76 अधिकारियों-कर्मचारियों की वेतनवृद्धि रोकने तथा 80 ठेकेदारों या फर्मों को ब्लैकलिस्ट किए जाने का भी उल्लेख है।

तकनीक और AI से होगी निगरानी

अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने सरकारी खरीदी में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर जोर दिया है। विभागीय स्तर पर डेटा विश्लेषण के जरिए अलग-अलग नगरीय निकायों में खरीदी गई वस्तुओं की कीमतों और खरीद संबंधी आंकड़ों की तुलना की जा रही है।इससे असामान्य दरों, जरूरत से अधिक खरीदी और संभावित वित्तीय अनियमितताओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है। सरकार का उद्देश्य निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाना और खरीद प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

 जनता के पैसे का पारदर्शी उपयोग सरकार का लक्ष्य

सरकारी खरीदी में GeM पोर्टल का उद्देश्य प्रतिस्पर्धी दरों पर गुणवत्तापूर्ण सामान उपलब्ध कराना और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। ऐसे में यदि किसी निकाय में समान वस्तु की कीमत दूसरे निकाय की तुलना में कई गुना अधिक पाई जाती है, तो उसके कारणों की जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। मध्य प्रदेश सरकार की इस कार्रवाई से नगरीय निकायों की खरीदी प्रक्रिया और अधिकारियों की जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित हुआ है। अब जांच के निष्कर्ष, वसूली की अंतिम राशि और संबंधित अधिकारियों व सप्लायर्स के विरुद्ध होने वाली आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य जनता के पैसे का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना और नागरिकों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाना है।

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Ravi Shukla रवि शुक्ला एक अनुभवी ग्राउंड रिपोर्टर हैं, दैनिक अखबारों और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है.रवि शुक्ला की मुख्य विशेषज्ञता हाइपर लोकल क्राइम, क्षेत्रीय राजनीति, प्रशासनिक,शिक्षा, फैसलों और ग्रामीण विषयों (खेती-किसानी) की ग्राउंड जीरो से तथ्यपरक रिपोर्टिंग करने में अच्छा अनुभव है।