पेट्रोल-डीजल और गैस होगी महंगी! होर्मुज संकट से भारत का आयात खर्च 1.8 लाख करोड़ बढ़ा
Hormuz Crisis के कारण भारत का तेल और गैस आयात खर्च 1.8 लाख करोड़ बढ़ा.जानें क्या पेट्रोल, डीजल और LPG के दाम बढ़ेंगे।
पेट्रोल-डीजल और गैस होगी महंगी! होर्मुज संकट से भारत का आयात खर्च 1.8 लाख करोड़ बढ़ा
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज संकट का असर अब भारत की ऊर्जा अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है. हालिया रिपोर्ट के मुताबिक मार्च से अगस्त 2026 के बीच भारत को कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और LNG आयात पर करीब 22 अरब डॉलर (लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये) का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा है.रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) के अनुसार, यह चीन के बाद किसी एक देश का दूसरा सबसे बड़ा अतिरिक्त आयात खर्च है.
भारत पर कितना पड़ा असर
CREA के मुताबिक सभी फॉसिल फ्यूल को मिलाकर भारत का नेट अतिरिक्त खर्च 14.4 अरब डॉलर रहा, जो देश की GDP का करीब 0.38% है.सिर्फ कच्चे तेल पर ही भारत को 20.5 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ा.
दुनिया भर में बढ़ा खर्च
होर्मुज संकट के चलते दुनिया भर के देशों को पिछले 6 महीनों में कुल 330 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ा. कच्चा तेल: 164.1 अरब डॉलर,डीजल/गैसोइल: 73.8 अरब डॉलर,पेट्रोल: 35.7 अरब डॉलर,LNG: 38 अरब डॉलर.
ब्रेंट क्रूड में तेज उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें अनुमान से औसतन 35% ज्यादा रहीं.मार्च से अगस्त के बीच ब्रेंट का औसत भाव 93 डॉलर प्रति बैरल रहा, जबकि 23 जुलाई को यह 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया,डीजल की कीमतें भी औसतन 59% ज्यादा रहीं.
LPG भी हुआ महंगा
इस अवधि में भारत को LPG आयात के लिए भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी,LPG कीमतें अनुमान से 29% ज्यादा रहीं,आयात मात्रा 26% कम रही,कुल आयात बिल करीब 4.7 अरब डॉलर,अतिरिक्त खर्च करीब 1.1 अरब डॉलर.
क्लीन एनर्जी से मिली राहत
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) के बढ़ते इस्तेमाल से कई देशों को राहत मिली.2020 के बाद बढ़ी क्लीन एनर्जी क्षमता के चलते 5 महीनों में करीब 36 अरब डॉलर का आयात खर्च बचा, जिसमें भारत भी शामिल है.
क्या आम लोगों पर पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि आयात खर्च बढ़ने का सीधा मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम उतने ही बढ़ जाएंगे. खुदरा कीमतों पर टैक्स, सब्सिडी और सरकारी नीतियों का भी बड़ा असर होता है. कुल मिलाकर, होर्मुज संकट ने भारत समेत दुनिया भर के देशों की ऊर्जा लागत बढ़ा दी है, जिससे आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना है।
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