भगवान के नाम स्मरण से मिलता है परमधाम : श्रीकृष्ण चंद्र शास्त्री

श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस ऋषभदेव, जड़भरत और अजामिल की कथा का हुआ भावपूर्ण वर्णन

Oct 23, 2026 - 21:34
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भगवान के नाम स्मरण से मिलता है परमधाम : श्रीकृष्ण चंद्र शास्त्री
श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस

भगवान के नाम स्मरण से मिलता है परमधाम : श्रीकृष्ण चंद्र शास्त्री

श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस ऋषभदेव, जड़भरत और अजामिल की कथा का हुआ भावपूर्ण वर्णन

सीधी। शहर के डैनिहा स्थित शांतिनिकेतन बखरी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस दिन सुप्रसिद्ध कथावाचक भागवत भास्कर श्रीकृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुर जी महाराज ने ऋषभदेव, जड़भरत और अजामिल की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के मुख्य यजवान शीला मुकुटधारी सिंह चौहान सहित उपस्थित श्रोताओं को उन्होंने महापुरुषों की सेवा का महत्व बताते हुए कहा कि महापुरुषों की सेवा मुक्ति का द्वार है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को संतों और महापुरुषों की सेवा एवं उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।

ऋषभदेव जी के प्रसंग का वर्णन करते हुए शास्त्रीजी ने बताया कि भगवान ऋषभदेव के सौ पुत्र थे। उन्होंने अपने पुत्रों को सुंदर उपदेश देते हुए महापुरुषों की सेवा को मुक्ति का मार्ग बताया। जब पुत्रों ने पूछा कि महापुरुषों की पहचान कैसे की जाए, तब ऋषभदेवजी ने बताया कि जिनका मन शांत रहता है, जो क्रोध से दूर रहते हैं तथा जिन्हें न अपमान का भय होता है और न ही सम्मान की इच्छा, वही सच्चे महापुरुष और संत हैं। पुत्रों को उपदेश देने के बाद ऋषभदेव जी ने अपने ज्येष्ठ पुत्र को राज्य की गद्दी सौंपी और स्वयं वन की ओर प्रस्थान कर गए।

कथा को आगे बढ़ाते हुए शास्त्री जी ने जड़भरत जी के प्रसंग के साथ भूगोल और खगोल का वर्णन किया तथा अजामिल की कथा का विस्तार से विवेचन किया। उन्होंने बताया कि अजामिल ब्राह्मण कुल में जन्मे थे और नियमित रूप से संध्यावंदन तथा अग्निहोत्र किया करते थे। किंतु एक दिन वेश्या के आकर्षण में पड़कर उन्होंने उससे विवाह कर लिया। उनके दस पुत्र हुए, जिनमें सबसे छोटे पुत्र का नाम संतों के कहने पर नारायण रखा गया।

अंतिम समय में नारायण नाम का स्मरण करने के प्रसंग के माध्यम से शास्त्री जी ने भगवान के नाम की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अग्नि को स्पर्श करने पर वह जलाती है, उसी प्रकार भगवान का नाम किसी भी प्रकार से लिया जाए, उसका स्मरण मनुष्य को भगवान के परमधाम की प्राप्ति का मार्ग दिखाता है। कथा के समापन पर विधिवत आरती की गई। इस दौरान कथा के आयोजक विनय सिंह, अजय सिंह एवं अभय सिंह उपस्थित रहे। 

हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु 

कथा में मुख्य यजवान शीला मुकुटधारी सिंह चौहान सेवानिवृत्त मुख्य नगर पालिका अधिकारी सहित पूर्व विधायक पंडित केदारनाथ शुक्ला, पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल, नगर पालिका उपाध्यक्ष दान बहादुर सिंह चौहान, रुद्र प्रताप सिंह, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह मुन्नू, ज्ञानेन्द्र द्विवेदी, एड. मदन प्रताप सिंह, आकाश सिंह रिंकू, मंगलेश्वर सिंह, शत्रुहन तिवारी, कमल कामदार, अंजल पाण्डेय, अमलेश्वर चतुर्वेदी, सुरेन्द्र पांडेय, भूपेन्द्र पांडेय, पत्रकार प्रवीण तिवारी, अखिलेश चतुर्वेदी कामता सिंह, बाबा सिंह सहित हजारों की संख्या में कथा श्रवण करने लोगों की भीड़ जमा रही।

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Ravi Shukla रवि शुक्ला एक अनुभवी ग्राउंड रिपोर्टर हैं, दैनिक अखबारों और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है.रवि शुक्ला की मुख्य विशेषज्ञता हाइपर लोकल क्राइम, क्षेत्रीय राजनीति, प्रशासनिक,शिक्षा, फैसलों और ग्रामीण विषयों (खेती-किसानी) की ग्राउंड जीरो से तथ्यपरक रिपोर्टिंग करने में अच्छा अनुभव है।