Navratri Vrat Diet: अगर आप भी नवरात्र में व्रत रहते हैं,ऐसे रखें फलाहार का ध्यान,फलाहार में इन चीजों को करें शामिल
Navratri Vrat Diet: अगर आप भी नवरात्र में व्रत रहते हैं,ऐसे रखें फलाहार का ध्यान,फलाहार में इन चीजों को करें शामिल
लाइफस्टाइल डेस्क। नवरात्र के दिनों में बड़ी संख्या में लोग व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन बिना कुछ खाए रहते हैं, तो कुछ फल, साबूदाना, कुट्टू, आलू और अन्य फलाहारी चीजों का सेवन करते हैं। हालांकि, व्रत के दौरान सिर्फ खाना छोड़ देना ही पर्याप्त नहीं है। फलाहार ऐसा होना चाहिए, जिससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिलते रहें और कमजोरी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम हो।
अक्सर व्रत के दौरान साबूदाना वड़ा, कुट्टू की पूड़ी, पकौड़ी, आलू के चिप्स और मिठाइयों का सेवन बढ़ जाता है। इससे फलाहार अनजाने में अधिक कैलोरी, वसा और नमक वाला भोजन बन सकता है। इसलिए नवरात्र में आस्था और अनुशासन के साथ पोषण का ध्यान रखना भी जरूरी है।
नवरात्र का मतलब खाना छोड़ना नहीं
व्रत केवल भोजन से परहेज करने का नाम नहीं है। यह आत्मसंयम और अनुशासन से भी जुड़ा है। ऐसे में दिनभर भूखे रहने के बजाय अपनी व्रत परंपरा के अनुसार संतुलित और पौष्टिक फलाहार लेना बेहतर हो सकता है।
फलाहार की थाली में प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और स्वस्थ वसा का संतुलन बनाए रखना चाहिए।
फलाहार में इन चीजों को करें शामिल
प्रोटीन: दूध, दही, पनीर, मखाना और सीमित मात्रा में मूंगफली व सूखे मेवे।
फाइबर: खीरा, टमाटर, लौकी, कद्दू, पालक और अन्य अनुमत हरी सब्जियां।
कार्बोहाइड्रेट: कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगीरा और सामा चावल।
स्वस्थ वसा: बादाम, अखरोट, चिया और अलसी के बीज तथा सीमित मात्रा में मूंगफली।
साबूदाना और कुट्टू खाते समय रखें मात्रा का ध्यान
साबूदाना, कुट्टू और सामा जैसे खाद्य पदार्थ व्रत में लोकप्रिय हैं, लेकिन इनकी मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है। साबूदाना वड़ा, कुट्टू की पूड़ी, पकौड़ी और आलू के चिप्स जैसे तले हुए खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन कैलोरी और वसा की मात्रा बढ़ा सकता है।
इनकी जगह कम तेल में बना कुट्टू या सिंघाड़े का चीला, कम तेल-घी वाली साबूदाना खिचड़ी और भुने हुए मखाने बेहतर विकल्प हो सकते हैं। आलू का सेवन अधिक करने के बजाय उसे दही और अनुमत सब्जियों के साथ संतुलित किया जा सकता है।
फल खाएं, लेकिन जूस से बचें
व्रत में फल लेना अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन दिनभर थोड़ा-थोड़ा करके बहुत अधिक फल खाने से कुल कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट बढ़ सकते हैं। एक समय में एक फल लेना बेहतर है।
सेब, अमरूद, नाशपाती, पपीता और संतरा जैसे फल विकल्प हो सकते हैं। वहीं केला, चीकू, अंगूर और आम जैसे अधिक मीठे फलों की मात्रा पर विशेष रूप से डायबिटीज या वजन नियंत्रित करने वाले लोगों को ध्यान देना चाहिए।
पूरे फल को जूस की तुलना में प्राथमिकता दें, क्योंकि पूरे फल में फाइबर भी मिलता है और पेट भरा हुआ महसूस होता है।
व्रत में पानी को न करें नजरअंदाज
व्रत के दौरान कमजोरी, सिरदर्द और थकान का एक कारण पर्याप्त पानी न पीना भी हो सकता है। इसलिए अपनी व्रत परंपरा और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार पर्याप्त तरल लेते रहें।
बिना चीनी का नींबू पानी, ताजा छाछ और नारियल पानी विकल्प हो सकते हैं। वहीं मीठे शरबत, पैकेज्ड जूस और सॉफ्ट ड्रिंक से बचना बेहतर है।
सेंधा नमक भी सीमित मात्रा में लें
व्रत में सेंधा नमक का इस्तेमाल आम है, लेकिन इसमें भी सोडियम होता है। इसलिए इसे भी सीमित मात्रा में लेना चाहिए। बाजार में मिलने वाले व्रत के चिप्स, नमकीन और पापड़ में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है।
खासकर हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को नमक और पैकेज्ड व्रत वाले स्नैक्स के सेवन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
पूरे दिन भूखे रहकर रात में ज्यादा न खाएं
दिनभर कुछ न खाने के बाद शाम को अचानक बहुत ज्यादा भोजन करना भी उचित नहीं है। अपनी व्रत परंपरा के अनुसार छोटे और संतुलित मील लेना बेहतर हो सकता है। फल के साथ दही, मखाने के साथ दूध, पनीर के साथ अनुमत सब्जियां या कुट्टू का चीला-दही जैसे संयोजन से भोजन में संतुलन बनाया जा सकता है।
डायबिटीज और बीपी वालों को विशेष सावधानी
डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्वास्थ्य समस्या होने पर व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। अनियंत्रित डायबिटीज, बार-बार लो ब्लड शुगर, गर्भावस्था या किडनी संबंधी समस्या होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के व्रत नहीं रखना चाहिए।
डॉक्टर की अनुमति से व्रत रख रहे हैं तो ब्लड ग्लूकोज की नियमित निगरानी करें। इंसुलिन या किसी दवा की खुराक अपने आप कम या ज्यादा न करें और दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद न करें।
कंपकंपी, अत्यधिक कमजोरी, पसीना, चक्कर, उल्टी, भ्रम या अस्वस्थ महसूस होने जैसी स्थिति में व्रत जारी रखना उचित नहीं है और चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
नवरात्र में ऐसा हो सकता है आपका फलाहार प्लान
सुबह: पानी, बिना चीनी की चाय या दूध के साथ 4-5 बादाम और 1-2 अखरोट।
नाश्ता: दही के साथ कुट्टू या सामा का हल्का चीला अथवा पनीर के साथ कुट्टू/सिंघाड़े की रोटी। इसके बाद जरूरत के अनुसार कोई एक फल।
दोपहर: कुट्टू या राजगीरा की रोटी, पनीर या दही, अनुमत हरी सब्जी और सलाद।
शाम: भुने मखाने या थोड़े मेवे और बिना चीनी का पेय।
रात: हल्की सब्जी, दही या पनीर और सीमित मात्रा में सामा या कुट्टू से बना भोजन।
व्रत में 'क्या न खाएं' से ज्यादा जरूरी है 'क्या खाएं'
नवरात्र में व्रत रखते समय केवल इस बात पर ध्यान न दें कि क्या नहीं खाना है। यह भी देखें कि शरीर को पर्याप्त पोषण कैसे दिया जाए। तली हुई चीजें कम करें, प्रोटीन और फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को जगह दें, फलों की मात्रा संतुलित रखें और पर्याप्त पानी पिएं। व्रत में भी आपकी थाली संतुलित, पौष्टिक और विविध हो सकती है। आस्था और व्रत की परंपरा का पालन करते हुए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
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