देवई पंचायत में जमकर भ्रष्टाचार,सचिव के बिना हस्ताक्षर राशि का किया जा रहा आहरण

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देवई पंचायत में जमकर भ्रष्टाचार,सचिव के बिना हस्ताक्षर राशि का किया जा रहा आहरण




देवई पंचायत में जमकर भ्रष्टाचार,सचिव के बिना हस्ताक्षर राशि का किया जा रहा आहरण


रवि शुक्ला,मझौली

मध्यप्रदेश में बड़े घोटालों पर अक्सर चर्चा होती है, लेकिन गांवों में ग्राम पंचायत स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार पर किसी का ध्यान नहीं जाता. ग्राम पंचायतों की योजनाओं में बड़ी संख्या में घोटाले होते हैं, जिनकी न तो सही जांच होती है और न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई ही होती है.
ऐसा ही मामला मझौली जनपद के ग्राम पंचायत देवई का आया है जहां जमकर भ्रष्टाचार की इबारत लिखी जा रही है, पंचायत द्वारा कराए गए निर्माण कार्य का सूचना पटल तक नहीं लगाया गया,जबकि महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में पारदर्शिता लाने के लिए सामुदायिक एवं हितग्राही मूलक निर्माण कार्यों से पहले सूचना पटल लगाना जरूरी होता है ताकि ग्रामीणों को यह जानकारी हो सके कि कार्य कितनी लागत और किसके द्वारा कराया गया है,लेकिन देवई पंचायत में साइन बोर्ड लगाने की जरूरत नहीं समझी जाती,राशि आहरित कर ली जाती है है. और बिना जांच किए जनपद बैठे जिम्मेदार राशि का भुगतान भी कर देते है।


सचिव के बिना हस्ताक्षर के राशि का बंदरबाट

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार देवई पंचायत के सरपंच और उपयंत्री के मिलीभगत से सचिव के बिना हस्ताक्षर के राशि का भुगतान कर बंदरबाट किया जाता है रहा है, जबकि बताया यह गया कि सचिव के बिना हस्ताक्षर के मस्टर का मूल्यांकन नहीं होता है. सरपंच द्वारा पंचायत में निर्माण कार्य मजदूरों के बजाय जेसीबी मशीन से कराया जाता है अगर कार्य 25 घंटे कराया गया तो भुगतान 50 घंटे का किया जाता है,पूरे राशि का आहरण फर्जी मस्टर लगाकर कर ली जाती है सूत्रों ने यह भी बताया कि यह पूरा कारनामा सरपंच और उपयंत्री के मिलीभगत से किया जाता है वहीं जनपद में बैठे शाहबानो द्वारा राशि का भुगतान कर दिया जाता.


सरपंच का गोलमोल जबाव

देवई पंचायत के सरपंच जगदीश यादव से झिरिया टोला में बने प्ररकुलेशन टैंक और डोल टोला में बने पुल के बारे में जानकारी चाही गई तो गोल मोल जबाव दिए, उनके द्वारा यह कह दिया गया कि हमें यह जानकारी नहीं है कि पुल का निर्माण कितने लागत से कराया गया साइन बोर्ड के बारे में भी कोई सही जबाव नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि आपको पता है कि आजकल लोग बिना पढ़े लिखे सरपंच बन जाते हैं,हमें जानकारी नहीं है जब उनसे पूछा गया कि किस मद से बना है बताया कि मनरेगा और पंद्रहवां वित्त से बना है,जबकि सूत्रों द्वारा यह बताया गया कि पुल का निर्माण कार्य सरपंच द्वारा ही कराया गया था.और उनको पूरी जानकारी है, इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरपंच लोगों को गुमराह कर पंचायत में जमकर मलाई छान रहे हैं।मामला चाहे जो कुछ भी हो यह तो जांच का विषय है,लेकिन ऐसे भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही होना जरूरी है,अब देखना यह होगा कि खबर प्रकाशन के बाद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा क्या कुछ कार्रवाई की जाएगी।

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