तत्वदर्शी महापुरुष ही शिव स्वरूप होते हैं-स्वामी अड़गड़ानन्द जी महाराज

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तत्वदर्शी महापुरुष ही शिव स्वरूप होते हैं-स्वामी अड़गड़ानन्द जी महाराज



तत्वदर्शी महापुरुष ही शिव स्वरूप होते हैं-स्वामी अड़गड़ानन्द जी महाराज 

(संतोष तिवारी )-महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर परमपूज्य गुरुदेव भगवान स्वामी अड़गड़ानन्द जी महाराज ने पालघर आश्रम मे भक्तों को शिवरात्रि के विषय मे बताये और सत्संग के दौरान पूज्य स्वामी जी शिव के स्वरूप को बताये की शंकर स्वरूप महापुरुष की क्या स्तिथी होती है पूज्य स्वामी जी बताये की कई रात्रियां होती हैं काल रात्रि,शीत रात्रि, मोह रात्रि जगतरूपी रात्रि और ये शिवरात्रि शिव का मतलब होता है कल्याण स्वरूप जो कल्याण स्वरूप की स्तिथी को प्राप्त हो जाते हैं ऐसे तत्वदर्शी महापुरुष ही शिव स्वरूप होते हैं। और उस स्तिथी को पाने के लिए मानस मे गोस्वामी जी ने कहा है की मै उन शंकर रूपी गुरु की वंदना करता हूँ जिनके आश्रित होने से टेढ़ा चन्द्रमा भी वंदनीय हो जाता है वास्तव मे यह मन ही चन्द्रमा है और सबका मन टेढ़ा है जन्म जन्मांतर से अनंत योनियों मे जाने का कारण है लेकिन उससे छुटकारा पाने के लिए ऐसे तत्वदर्शी महापुरुष का आश्रय लेना पड़ेगा उनके चरणों का जो साधक आश्रय लेता है तो धीरे -धीरे उन महापुरुष की कृपा से उसकी आत्मा जागृत हो जाती है और भजन चिंतन करके वो परमात्मा तक की दूरी साधक तय कर लेता है। उसके लिए गुरु महाराज जी ने बताये की किसी एक नाम ओम, राम, या शिव का जप करना चाहिए तत्वदर्शी महापुरुष के स्वरूप का ध्यान करना चाहिए इतना अगर साधक से करते बन गया तो एक न एक दिन ईश्वरीय राह उसको मिल जाएगी अंत मे पूज्य स्वामी जी ने बताये की शिवरात्रि को सार्थक करने के लिए धर्मशास्त्र (यथार्थ गीता )का ध्यान करो, यथार्थ गीता के पद चिन्हो पर चलने का प्रयास करो और ऐसे तत्वदर्शी सदगुरु का आश्रय प्राप्त करने के लिए नाम का जप करो और संतो की सेवा करो यथार्थ गीता का अध्ययन करो इस दौरान सत्संग के दौरान पूज्य स्वामी जी के सांथ श्री चिंतनमयानन्द जी महाराज,श्री संतोष महाराज जी, श्री तानसेन महाराज जी श्री बिल्लू महाराज जी, श्री लाले महाराज जी, श्री आशीष महाराज जी, श्री शिवानंद महाराज जी, श्री दीपक महाराज जी, श्री मनीष महाराज जी, श्री पालनहार महाराज जी, श्री अखिलेश महाराज जी, श्री बिक्की महाराज जी, श्री पंचू महाराज जी, श्री मंतराम महाराज जी, श्री संजय महाराज जी, श्री किशमिश महाराज जी, श्री राजकुमार महाराज जी सहित इत्यादि संत जन बिराजमान थे एवं हजारों की संख्या मे भक्तगण उपस्तिथ थे।

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