गौरव उपाध्याय ने लिखी पुस्तक ‘मोस्ट वांटेड जिंदगी’ जिंदगी जीने का अंदाज सिखाती है

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गौरव उपाध्याय ने लिखी पुस्तक ‘मोस्ट वांटेड जिंदगी’ जिंदगी जीने का अंदाज सिखाती है



गौरव उपाध्याय ने लिखी पुस्तक ‘मोस्ट वांटेड जिंदगी’ जिंदगी जीने का अंदाज सिखाती है



*मोस्ट वांटेड जिंदगी तलाश उस जिंदगी की जो आप जीना चाहते है*

" मैं तुम्हें तुमसे नज़रें मिलाकर जीने का एक ज़रिया बताना चाहता हूँ, 
 तुम्हें ख़ुद ही बदलना होगा, ख़ुद का नज़रिया, यह बताना चाहता हूँ।"
आपका जीवन, आपकी कहानी आपके हाथों में है और अगर आप इस कहानी का अंत अपने हिसाब से चाहते हैं तो आपको आज ही ज़िम्मेदारी लेनी पड़ेगी। अगर आप सोचते हैं कि कोई और आकर आप की ज़िंदगी को खुशियों से भर देगा तो यह इंतजार गलत है। अगर आप खुद अपनी जिंदगी का जिम्मा नहीं लेंगे तो भला और कौन लेगा! माना वक्त लगता है लेकिन अपने जीवन के मूल उद्देश्य पता करने की कोशिश करें और फिर उस पर बने रहें। आपको आपकी 'मोस्ट वांटेड जिंदगी' जरूर मिलेगी। 

"एक भरोसे की ज़रूरत है तुम्हारे सच को अपनाने के लिए,  ज़िंदगी को बदल कर देखने की ज़रूरत है, बदल जाने के लिए।"
मैंने अपनी किताब 'मोस्ट वांटेड जिंदगी' में ऐसी ही ढेर सारी बातों के जरिए जिंदगी से हार मान कर एक कोने में बैठ चुके और उदासी को अपनी नियति मान चुके लोगों में उम्मीद जगाने की कोशिश की है। यह किताब हार मान चुके लोगों के एक-एक डर पर बात करती है, ताकि कोई भी डर या असुरक्षा की भावना मन के किसी कोने में बैठी न रह जाए। हिंदी में जीवन और जीवन जीने की कला से जुड़ी हुई किताबें बेहद कम हैं। ऐसे में मैंने यह किताब उस खाली जगह को भरने के प्रयास से लिखा है। 

मैं इस किताब को पिरोने में गद्य और पद्य, दोनों का सहारा लिया हूं। पहले आप जिंदगी के सारे सबक को कविता के माध्यम से पढ़ते हैं। उसके बाद इन सभी सबक को इतने सरल तरीके से समझते हैं कि दिमाग में कोई उलझन नहीं होती है। किताब में मैंने एक लेखक नहीं बल्कि एक शुभचिंतक के रूप में जीवन की जरूरी बातें सहज रूप में समझाने की कोशिश की है। यह किताब मेरे जीवन के अनुभवों की एक सहज और बेहद ईमानदार अभिव्यक्ति है। मुझे उम्मीद है कि आप किताब में लिखी गई हर बात को पढ़कर ऐसा महसूस करेंगे कि अरे! ऐसा तो मेरे साथ भी होता है या यह तो मैं भी करता हूँ। साथ ही जाने-अनजाने में खुद से हुई छोटी-मोटी गलतियों को समझेंगे और उन्हें ना दोहराने की कोशिश करेंगे।

इस किताब के माध्यम से मैंने जिंदगी को जिंदादिली से जीने का अंदाज सिखाने की कोशिश की है। किताब में अब आम हो चुकी - ओवरथिंकिंग, डिप्रेशन, उदासी और उम्मीद खत्म होने जैसी मानसिक परेशानियों पर एक-एक करके बात की है। साथ ही इन समस्यओं के चंगुल से बाहर आने के सरल तरीके भी बताए हैं। 
"तुम्हें पता हो ना हो, एक छोटी सोच तुम्हारा सब कुछ बदल सकती है,
झूठी चिंताओं को मिटा कर, ज़िंदगी को सचमुच बदल सकती है।"
दरअसल सोच-विचार करना हमारे जीवन का एक बेहद जरूरी हिस्सा है लेकिन हमको यह पता होना चाहिए कि किन बातों पर विचार करके खुद को सुधारा जा सकता है और किन बातों पर विचार करना  छोड़ कर खुद को कई तरह के बंधनों से मुक्त किया जा सकता है। 

यह किताब अपने जीवन में कुछ सुधार लाने की इच्छा रखने वाले हर इंसान को पढ़नी चाहिए। गांव, कस्बों और छोटे शहरों से अपने सपनों को पूरा करने के लिए निकले मध्यम वर्गीय युवाओं को यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए। चूंकि मैं खुद एक छोटे शहर के मध्यम वर्गीय परिवार से निकलकर एक अच्छे मुकाम तक पहुंचा हूँ। इसलिए मध्यवर्गीय युवाओं के सपनों, उनके रास्ते में आने वाली परेशानियों और लक्ष्य तक पहुंचने के रास्तों के बारे में अच्छी तरह से जानता हूँ। यही कारण है कि मैंने अपनी किताब में मोटिवेट करने के नाम पर हवा-हवाई बातें नहीं की हैं बल्कि ऐसे तरीके सुझाएं हैं जिन्हें थोड़ी सी कोशिश करके ही अपने जीवन में अपनाया जा सकता है। अंत में दो पंक्तियों के साथ मैं आप से निवेदन करता हूं कि एक बार यह किताब अवश्य पढ़ें। 
" मैं बात करूँगा तुम्हारे दिल को फिर से रोशनी से मिलाने की,
मैं बात करूँगा ज़िंदगी को ज़िंदादिली से, मोहब्बत से जिए जाने की।"

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